बीकानेरवासियों.. पतंग नहीं ‘कोरोना वायरस’ काटना है

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चिंतन
बीकानेरवासियों.. पतंग नहीं ‘कोरोना वायरस’ काटना है

✍🏻मालाराम महिया सूडसर

सर्वप्रथम सभी को बीकानेर स्थापना दिवस की अनन्त शुभकामनाएं। एक गौरवपूर्ण इतिहास रहा है बीकानेर का। यहां तक कि बीकानेर की स्थापना ही एक जिद और जुनून का हिस्सा है। जोधपुर की नाक पर स्थापित किया गया बीकानेर, राव बीका के जुनून का ही साक्षी है। तब से अब तक बीकानेर के राजा महाराजाओं ने, आजादी के बाद बीकानेर के जनप्रतिनिधियों ने इस शहर को सजाया, संवारा और स्थानीय लोगों ने परम्पराओं को सहेज कर रखा। इसीलिए आज इस शहर की पहचान परम्परा वाले शहर के रूप में है। हम बीकानेर के लोग हर हाल में परम्पराओं का निर्वहन करते हैं। खाने के लिए भले दो रुपए नहीं है लेकिन अपनी सभ्यता को जीवित रखने के लिए हम ऋण लेकर, उधार लेकर भी काम करते हैं। ऐसे में इस बार शहर के स्थापना दिवस पर ही शहर को बचाने का दबाव हम सब पर आ गया है। ‘कोरोना वायरस’ के बहुत बड़े खतरे में हम सभी फंस चुके हैं। यह चीन का मानव जनित वायरस है या फिर चीन के वुहान में चमगादड़ों मनुष्य में आया कोई वायरस है? इस बारे में कोई तथ्य नहीं है। फिलहाल एक ही तथ्य है कि हम जब तक अपने घर में नहीं रहेंगे तब तक इस बीमारी से बच नहीं सकेंगे। इस बहुत बड़ी महामारी का एकमात्र इलाज सिर्फ और सिर्फ ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ है और जब तक यह नहीं होगा, तब तक हम स्वयं को बचा नहीं सकते। अब तक बीकानेर में कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या ३७ तक पहुंच चुकी है। पिछले कुछ दिनों से संक्रमित सामने भी नहीं आए हैं लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हम पूरी तरेह से सुरक्षित है। यहां वैसे ही ३७ रोगियों का पता चल चुका है, जबकि हकीकत यह है कि अगर एकमात्र रोगी भी है तो हम असुरक्षित है। बीकानेर में ३२ रोगी ठीक हो गए हैं, इसके बाद भी हम सुरक्षित नहीं है। कहने का तात्पर्य सिर्फ इतना है कि बीकानेर के लोगों को ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ करनी है। अक्षय द्वितीय और अक्षय तृतीया पर हम सभी पतंगबाजी करते आए हैं। बचपन से हम इस दिन का इंतजार करते आए हैं लेकिन इस बार परिस्थिति अलग है। जब हम मंदिर जाना छोड़ चुके हैं, मस्जिद में नमाज पढऩा छोड़ चुके हैं, गुरुद्वारे और चर्च में भी जाना बंद कर दिया है तो फिर अक्षय द्वितीय और अक्षय तृतीया पर पतंगबाजी नहीं छोड़ सकते। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि इस बार पतंगबाजी के लिए अपनी छत पर नहीं जाएं। जिला कलक्टर इस लड़ाई में बीकानेर के कप्तान है। हमें उनकी इस अपील का मान व सम्मान रखना चाहिए कि हम पतंगबाजी नहीं करें। क्या पता उस पतंग का धागा किसके हाथ से होकर आप तक पहुंच रहा है। क्या गारंटी है कि जिसकी पतंग कटकर आपके पास आई है, उसको कोरोना का संक्रमण नहीं था। कौन जिम्मेदारी लेता है कि पतंग व मांझा जिससे होकर आपके पास पहुंचा है, वो संक्रमित नहीं है। ऐसे में अपने परिवार की सुरक्षा के लिए, मोहल्ले की सुरक्षा के लिए, शहर की सुरक्षा के लिए, देश के लिए एक बार पतंगबाजी का मोह छोड़ दें। जिस दिन इस लड़ाई से जीत जाएंगे, उस दिन पतंग उड़ाएंगे।

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