निकली कलश यात्रा, गूंजे जयकारे, हवन व धर्मसभा आज

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ठुकरियासर. सरस ऋषि के भजनों की धुन पर जयकारे लगाते बालक व युवाओं की टोलियां तथा सिर पर कलश रखे महिलाओं व बालिकाओं की कतार को देखकर माहौल बड़ा ही मनमोहक बन गया। यह अवसर था गांव के सरस धोरा स्थित निर्माणाधीन सरस महाराज मन्दिर प्रांगण में मनाए जाने वाले श्रीसरसगढ़ स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में सोमवार को निकली कलश यात्रा का। यहां मंगलवार को मनाए जाने वाले सरसगढ़ स्थापना दिवस व आयोजित 27 कुण्डीय हवन से पूर्व कलश यात्रा निकाली गई। ठाकुरजी मंदिर से 121 कलशों के साथ शुरू हुई यह यात्रा गांव के विभिन्न मार्गों से होते हुए सरस धोरा पहुंची। इस दौरान “सरस ऋषि ने बार बार वंदना” “थारे मन्दिर में बोल मीठा मोरिया सरसजी जयकारो लगावां थार नाम को” आदि भजनों व जयकारों की गूंज से गांव का वातावरण गुंजायमान हो गया। सरस मंदिर निर्माण समिति व राष्ट्रीय सरस सेना के तत्वावधान में पहली बार हो रहे इस आयोजन का उत्साह हर ओर नजर आ रहा था। सारस्वत समाज के बुजुर्ग लोग भी आयोजन को भव्य बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं। रात्रि को जागरण का आयोजन भी हुआ।
हवन व धर्मसभा
यहां सुबह 10 बजे श्रीडूंगरगढ़ गुरुकुल के विद्वान पंडितों द्वारा पूजा अर्चना शुरू हुई अब 27 कुण्डिय हवन होगा। जिसमें 108 यजमान सपत्नीक मंगलकामनाओं के लिए आहुतियां देंगे। दोपहर को धर्मसभा होगी और इसमें विद्वज्जनों द्वारा धार्मिक चर्चा की जाएगी। यह आयोजन सरसगढ़ स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में पहली बार मनाया जा रहा है। श्रीडूंगरगढ़ नाम करण से पूर्व यह कस्बा सरसगढ़ के नाम से जाना जाता था और सारस्वत समाज के आराध्य देव सरस ऋषि द्वारा स्थापित किया गया था।

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