कामदा एकादशी आज : इस बार 02 योग और 07 शुभ मुहूर्त, जानें कब क्या करें?

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समाचार-गढ़ श्रीडूंगरगढ़। सनातन धर्म में एकादशी तिथि का अत्यंत महत्व माना गया है। वहीं हिन्दू पंचांग के अनुसार, एकादशी प्रत्येक माह में दो बार आती है और हर एक एकादशी का अपना एक विशेष महत्व होता है। हिन्दू पौराणिक शास्त्रों में एकादशी तिथि को भगवन विष्णु से जोड़कर देखा जाता है।
एकादशी को ‘हरि का दिन’ और ‘हरि वासर’ के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत को रखने की एक मान्यता यह भी है कि इससे पूर्वज या पितरों को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। चैत्र मास की शुक्ल एकादशी को कामदा एकादशी कहा जाता है। ऐसे में इस वर्ष 2021 में चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी शुक्रवार को 23 अप्रैल के दिन कामदा एकादशी का व्रत किया जाएगा।
पद्म पुराण के अनुसार कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। मान्यता के अनुसार कामदा एकादशी व्रत के प्रभाव से मनुष्य प्रेत योनि से मुक्ति पाता है।
वहीं इस बार यानि कल आने वाली कामदा एकादशी में खास बात ये भी है कि इस दिन एक दो बल्कि कुल 7 शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। इसके अलावा इस बार कामदा एकादशी पर वृद्धि व ध्रुव योग का भी निर्माण हो रहा है।
इसके तहत जहां वृद्धि योग 02 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। वहीं इसके ठीक बाद ध्रुव योग लग जाएगा। ज्योतिष शास्त्र में ध्रुव व वृद्धि योग को बेहद शुभ माना जाता है। इस दौरान मांगलिक कार्य किये जाते हैं।
शुक्रवार, 23 अप्रैल 2021- कामदा एकादशी
: ब्रह्म मुहूर्त- 04 बजकर 09 मिनट, अप्रैल 24 से 04 बजकर 53 मिनट, अप्रैल 24 तक।
: रवि योग- 05 बजकर 38 मिनट से 07 बजकर 42 मिनट तक।
: अभिजित मुहूर्त- 11 बजकर 41 मिनट से 12 बजकर 33 मिनट तक।
: निशिता मुहूर्त- 11 बजकर 45 मिनट से 12 बजकर 29 मिनट अप्रैल 24 तक।
: अमृत काल- 12 बजकर 20 मिनट, अप्रैल 24 से 01 बजकर 50 मिनट, अप्रैल 24 तक।
: विजय मुहूर्त- 02 बजकर 17 मिनट से 03 बजकर 09 मिनट तक।
: गोधूलि मुहूर्त- 06 बजकर 23 मिनट से 06 बजकर 47 मिनट तक।
मुहूर्त 
कामदा एकादशी पारणा मुहूर्त :05:47:12 से 08:24:09 तक 24, अप्रैल को
अवधि : 02 घंटे 36 मिनट
कामदा एकादशी व्रत विधि
कामदा एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान आादि से पवित्र होकर संकल्प लेते हुए भगवान श्री विष्णु का पूजन करनी चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु को फूल,फल,तिल, दूध, पंचामृत आदि पदार्थ अर्पित करने चाहिए। वहीं पूरे दिन निर्जल ( बिना पानी पिए) रह कर भगवान विष्णु जी के नाम का जप और कीर्तन करते हुए यह व्रत पूरा करना चाहिए।
इसके साथ ही एकादशी व्रत में ब्राह्मण भोजन व दक्षिणा का भी बहुत महत्व है। अत: द्वादशी के दिन ब्राह्मण भोज कराने के बाद दक्षिणा सहित ब्राह्मण को विदा करना चाहिए। इसके बाद स्वयं पारण करना चाहिए। मान्यता है कि इस प्रकार से जो व्यक्ति चैत्र शुक्ल पक्ष में कामदा एकादशी का व्रत रखता है, उसकी समस्त इच्छाओं की पूर्ति भगवान विष्णु की कृपा से शीघ्र ही पूर्ण होती है।

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