कोरोना काल में कारगर सिद्ध हुई कृषि यंत्र परीक्षण आवेदन की ऑनलाइन व्यवस्था कुलपति ने किया मशीनरी परीक्षण केन्द्र का अवलोकन

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समाचार-गढ़ 7 सितम्बर 2020। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. पी. सिंह ने सोमवार को कृषि यंत्र एवं मशीनरी परीक्षण एवं प्रशिक्षण केन्द्र का अवलोकन किया। इस दौरान प्रो. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा कोरोना काल में पहल करते हुए कृषि यंत्र मशीनरी परीक्षण आवेदन की आॅनलाइन व्यवस्था की गई। इससे विभिन्न राज्यों के कृषि यंत्र निर्माताओं को आवेदन के लिए बीकानेर आने की बाध्यता से मुक्ति मिली। इस अवधि में विश्वविद्यालय को कृषि यंत्र मशीनरी परीक्षण के 55 आवेदन मिले, जिनसे 55 लाख रुपये से अधिक राजस्व प्राप्ति भी हुई है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा देशभर में ऐसे 32 केन्द्र स्थापित किए हैं। इन केन्द्रों से परीक्षण के बाद ही किसानों को मशीनरी एवं यंत्र सब्सिडी पर मिल सकते हैं। राजस्थान में बीकानेर के अलावा उदयपुर में ऐसा केन्द्र है। उन्होंने बताया कि इस अवधि में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के यंत्र निर्माताओं के आवेदन मिले। उन्होंने कहा कि केन्द्र द्वारा इस व्यवस्था को बरकरार रखा जाए, जिससे सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग हो सके। कुलपति ने ‘कस्टम हायरिंग स्कीम’ के तहत किसानों को न्यूतनम दैनिक किराए के आधार पर दिए जाने वाले कृषि यंत्रों की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि इस योजना का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के प्रयास हों। उन्होंने केन्द्र में नवनिर्मित इंजन टेस्टिंग लैब के भवन का अवलोकन किया तथा इसे शीघ्र ही क्रियाशील करने के निर्देश दिए। उन्होंने केन्द्र में चल रहे निर्माण कार्यों की जानकारी ली तथा कहा कि यंत्र एवं मशीनरी के परीक्षण के लिए आने वाले आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण कर दिया जाए। केन्द्र प्रभारी इंजी. विपिन लढ्ढा ने बताया कि ‘कस्टम हायरिंग स्कीम’ के तहत अब तक लगभग 125 किसानों ने कृषि यंत्र किराए पर लिए हैं। केन्द्र को गत वर्ष क्वालिटी मैनेंजमेंट एवं एनवायरमेंट मैनेंजमेंट के लिए दो आइएसओ प्रमाण पत्र मिले। कृषि यंत्र एवं परीक्षण के फलस्वरूप वर्ष 2019-20 में केन्द्र को एक करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय हुई। इस दौरान अनुसंधान निदेशक डाॅ. पी. एस. शेखावत भी मौजूद रहे।

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