श्रीडूंगरगढ़ ऋषिकूल संस्कृत विद्यालय की नींव रखने वाले पारीक का निधन

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समाचार-गढ़ (श्रीडूंगरगढ़)। श्रीडूंगरगढ़ के पूर्णाराम पारीक का आज देहांत हो गया है। उनका पैतृक गांव लिखमीसर है। 90 वर्षीय पारीक का ब्राह्मण समाज में उल्लेखनीय योगदान रहा। उन्होंने श्रीडूंगरगढ़ ऋषिकूल संस्कृत विद्यालय की नींव रखकर संस्कृत भाषा का महत्व समझाने की कोशिश की। वे पारीक समाज के महत्वपूर्ण पदों पर रहकर समाज को बेहतर बनाने का प्रयास हमेशा करते रहे। उन्होंने ब्राह्मण समाज व पारीक भवन के अलावा कई सामाजिक व संस्थाओं में अपनी सेवाएं दी। पारीक के भरे पूरे परिवार में दो पुत्र सत्यनारायण व श्यामसुन्दर पारीक व चार पुत्रियों सहित नाती पोते है। स्वर्गीय पूर्णाराम पारीक की अंतिम यात्रा दोपहर 3 बजे उनके घर, कालूबास से रवाना होगी। स्वर्गीय पूर्णाराम ने अपने पैतृक गांव लिखमीसर में ठाकुरजी मंदिर का मंदिर संचालित किया तो वहीं श्रीडूंगरगढ़ में पुराना बस स्टैण्ड पर प्याऊ का निर्माण, पूनरासर रास्ते पर बरसाती पानी की प्याऊ का निर्माण करवाया। उनके निधन पर हर समाज के समाजसेवी शोक प्रकट कर रहे है।

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