शहीद कैप्टन चन्द्र चौधरी का शहादत दिवस आज, देश के लिए किये थे प्राण न्योछावर, आइए जानते है शहीद कैप्टन चन्द्र चौधरी से जुड़ी कुछ खास बातें।

0

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर वर्ष मेले,
वतन पर मरने वालों का बाकी यहीं निशां होगा।
समाचार-गढ़। श्रीडूंगरगढ़ 9 सितम्बर 2020। शहीदों की कुर्बानी के कारण ही हम महफूज है। बिग्गाबास रामसरा के कैप्टन शहीद चन्द्र चौधरी ने भी देश की सीमा की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर कर दिए है। आज कैप्टन चन्द्र चौधरी का 18 वां शहादत दिवस है। इस अवसर पर पैतृक गांव बिग्गाबास रामसरा व बीकानेर में स्थित शहीद कैप्टन चन्द्र चौधरी सर्किल पर कार्यक्रम आयोजित होंगे। आईए जानते है शहीद कैप्टन चन्द्र चौधरी के बारे में कुछ खास बातें-
शहीद कैप्टन चंद्र चौधरी का जन्म 16 अक्टूबर 1971 को बीकानेर जिले की श्रीडुंगरगढ़ तहसील में गाँव बिग्गावास रामसरा में पिता श्री कन्हैया लाल सियाग के घर में माँ श्रीमती सुन्दर देवी की कोख से हुआ। उनका विवाह लुणकरणसर निवासी शारदा चौधरी के साथ हुआ था। चन्द्र चौधरी के शहीद होने पर श्रीमती शारदा चौधरी को राजस्थान सरकार ने तहसीलदार के पद पर अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान कर सम्मानित किया है।
प्राथमिक शिक्षा अपने गाँव बिग्गावास रामसरा में हुई। प्राथमिक शिक्षा के बाद सैकंडरी तक की शिक्षा आवर लेडी आँफ नजरथ हाई स्कूल भाईन्दर मुंबई में हुई। कक्षा 10 वीं आपने 85 प्रतिशत अंको से उत्तीर्ण की। 12वीं तक की शिक्षा मीठी बाई काँलेज विले पार्ले मुंबई से ग्रहण कर बीकाँम की शिक्षा उस्मानिया युनिवर्सिटी हैदराबाद से उत्तीर्ण की। आपने कुछ समय तक बीकानेर अनाज मंडी में व्यापार भी किया था। अक्टूबर 1998 में सीडीएस की परीक्षा पास करते ही सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्ति मिली। एक वर्ष तक ओ. टी. एस. मद्रास में प्रशिक्षण लिया और 5 सितम्बर 1999 को भारत के महामहिम राष्ट्रपति के द्वारा सेना में कमीशन मिला। वर्ष 2000 में कैप्टन के पद पर पदोन्नत हुए। सन् 2000 में महु छावनी सेना का विशेष कोर्स करने के बाद बेलगांव में घातक कंमाडो का कोर्स किया और वे अपनी यूनिट के लीडर बने। पूरे सेवा काल में लाइन आँफ कंट्रोल पर रहे। जनवरी 2002 में उनका स्थानान्तरण फाजिल्का कर दिया। 8 सितम्बर 2002 कं मोहर जिला उद्धमपुर जम्मू कश्मीर में कई आंतकियों को मोत के घाट उतारा, उस समय आप घायल हो गए। ज्यादा घायल अवस्था में अपनी यूनिट पर तीन किमी. पैदल चलकर आये। समय पर चिकित्सा नहीं मिलने से 9 सितम्बर 2002 को हेलिकाप्टर से जम्मू लाते समय रास्ते में शहीद हो गए। शहीद कैप्टन चंद्र चौधरी के बिलदान को भुलाया नही जा सकता। आज शहीद कैप्टन चन्द्र चौधरी के शहादत दिवस पर समाचार गढ़ न्यूज पोर्टल भी उन्हें नमन करता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here