आज है स्कंद षष्ठी, जानें आज का पंचाग पँ. श्रवण भारद्वाज के साथ

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दिनांक – 19 मार्च 2021
वार – शुक्रवार
तिथि – षष्ठी
पक्ष – शुक्ल
माह – फाल्गुन
नक्षत्र – कृत्तिका 13:42 बजे तक तत्पश्चात रोहिणी नक्षत्र शुरू
योग – विश्कुम्भ
करण – कौलव 15:29 बजे तक तत्पश्चात तैतुल
वार शुक्रवार
चन्द्र राशि  – वृषभ
सूर्य राशि – मीन
रितु – शिशिर
आयन – उत्तरायण
संवत्सर – शार्वरी
विक्रम संवत – 2077 विक्रम संवत
शाका संवत – 1942 शाका संवत
सूर्योदय – 06:40 बजे
सूर्यास्त – 18:43 बजे
दिन काल – 12 घण्टे 03 मिनट
रात्री काल – 11 घण्टे 55 मिनट
चंद्रोदय – 10:04 बजे
चंद्रास्त – 24:02 बजे
राहू काल – 11:11 – 12:42 अशुभ
अभिजित – 12:18 -13:06 शुभ
दिशाशूल – पश्चिम
पंचक – नहीं
समय मानक – मोमासर (बीकानेर)
चोघडिया, दिन
चर  – 06:40 – 08:11 शुभ
लाभ  – 08:11 – 09:41 शुभ
अमृत – 09:41 – 11:11 शुभ
काल – 11:11 – 12:42 अशुभ
शुभ – 12:42 – 14:12 शुभ
रोग – 14:12 – 15:43 अशुभ
उद्वेग – 15:43 – 17:13 अशुभ
चर – 17:13 – 18:43 शुभ
चोघडिया, रात
रोग – 18:43 – 20:13 अशुभ
काल – 20:13 – 21:42 अशुभ
लाभ – 21:42 – 23:12 शुभ
उद्वेग – 23:12 – 24:41* अशुभ
शुभ – 24:41* – 26:11* शुभ
अमृत – 26:11* – 27:40* शुभ
चर – 27:40* – 29:10* शुभ
रोग – 29:10* – 30:39* अशुभ
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
तिथि का स्वामी –   षष्टी तिथि के स्वामी कार्तिकेय जी है।षष्ठी (छठ) के देवता भगवान भोलेनाथ के पुत्र और देवताओं के सेनापति कार्तिकेय जी है।
नक्षत्र के स्वामी –  कृतिका नक्षत्र के देवता अग्नि देव और स्वामी सूर्य देव जी है ।
दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही खाकर जाएँ ।
यात्रा शकुन- शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
आज का उपाय-बहते जल में बताशे प्रवाहित करें।
वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
विशेष – मित्रों, षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय हैं तथा नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
कार्तिकेय जी को युवा और बाल्य रूप में ही पूजा जाता है। भगवान कार्तिकेय जी को सदेव युवा रहने का वरदान प्राप्त है ।
इस तिथि में कार्तिकेय जी की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से भक्तो को बल और साहस की प्राप्ति होती है, विवाद, मुक़दमो में सफलता मिलती है, शत्रु परास्त होते है।
कार्तिकेय गायत्री मंत्र : – ‘ॐ तत्पुरुषाय विद्महे: महा सैन्या धीमहि तन्नो स्कन्दा प्रचोदयात’. यह मंत्र हर प्रकार के दुख एवं कष्टों का नाश करने के लिए प्रभावशाली है ।
घर में सुख शांति के लिए
घर में सुख शांति के लिए ” ॐ शांति ” ” ॐ आनंद” जप करें | जप विशेष तिथियों को इसका खास लाभ लें |
माला टूटने पर
माला कभी टूट जाए ..और दाने खो जाएँ तो वैसी दूसरी नयी माला तोड़ कर उसके मनके माला में डाल दें .. क्यूंकि जिस माला पर जप किया है वो दाने(मनके) प्रभावशाली रहते हैं ।

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