आज हैं विनायक चतुर्थी, जानें आज का पंचाग पँ. श्रवण भारद्वाज के साथ

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दिनांक – 17 मार्च 2021
वार – बुधवार
तिथि – चतुर्थी
पक्ष – शुक्ल
माह – फाल्गुन
नक्षत्र – अश्विनी 07:29 बजे तक तत्पश्चात भरणी नक्षत्र शुरू
योग – ऐन्द्र
करण– वणिज10:11 बजे तक तत्पश्चात विष्टि भद्र
चन्द्र राशि  – मेष
सूर्य राशि – मीन
रितु – शिशिर
आयन – उत्तरायण
संवत्सर – शार्वरी
विक्रम संवत – 2077 विक्रम संवत
शाका संवत – 1942 शाका संवत
सूर्योदय – 06:42 बजे
सूर्यास्त – 18:42 बजे
दिन काल – 12 घण्टे
रात्री काल – 12 घण्टे
चंद्रोदय – 08:56 बजे
चंद्रास्त – 22:14 बजे
राहू काल – 12:42 – 14:12 अशुभ
अभिजित – 12:18 -13:06  अशुभ
चोघडिया, दिन
लाभ – 06:43 – 08:13 शुभ
अमृत – 08:13 – 09:42 शुभ
काल – 09:42 – 11:12 अशुभ
शुभ – 11:12 – 12:42 शुभ
रोग – 12:42 – 14:12 अशुभ
उद्वेग – 14:12 – 15:42 अशुभ
चर – 15:42 – 17:12 शुभ
लाभ – 17:12 – 18:42 शुभ
चोघडिया, रात
उद्वेग – 18:42 – 20:12 अशुभ
शुभ – 20:12 – 21:42 शुभ
अमृत – 21:42 – 23:12 शुभ
चर – 23:12 – 24:42* शुभ
रोग – 24:42* – 26:12* अशुभ
काल – 26:12* – 27:42* अशुभ
लाभ – 27:42* – 29:12* शुभ
उद्वेग – 29:12* – 30:41* अशुभ
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है। बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। इस दिन गणेशजी की पूजा अर्चना से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।
बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है ।
तिथि के स्वामी – चतुर्थी तिथि के स्वामी विघ्नहर्ता गणेश जी और पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी है।
नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी-   अश्विनी नक्षत्र के देवता अश्विनीकुमार जी और नक्षत्र के स्वामी केतु जी है ।
दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो, यात्रा करनी ही हो तो धनिया, तिल की वस्तु, ईलायची अथवा पिस्ता खाकर यात्रा कर सकते है।
यात्रा शकुन-हरे फल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
आज का उपाय-किसी बटुक को कांस्य पात्र दान करें।
वनस्पति तंत्र उपाय- अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
विशेष –  चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।
आज विनायक चतुर्थी तिथि है। चतुर्थी तिथि के स्वामी देवताओं में प्रथमपूज्य भगवान गणेश जी माने गए हैं।
अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी तो पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। विनायक चतुर्थी की पूजा अमूमन दोपहर काल में की जाती है।
चतुर्थी को गणपित जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके, लड्डुओं या गुड़ का भोग लगाकर “ॐ गण गणपतये नम:” मन्त्र की एक माला का जाप अवश्य करें ।
चतुर्थी को गणेश जी की आराधना से किसी भी कार्य में विघ्न नहीं आते है, कार्यो में श्रेष्ठ सफलता मिलती है ।

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