कल हैं एकादशी व्रत, जाने आज का पंचाग व अन्य उपयोगी जानकारी पँ. श्रवण भारद्वाज के साथ

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दिनांक – 06 अप्रेल 2021
वार – मंगलवार
तिथि – दशमी
पक्ष – कृष्ण पक्ष
माह – चैत्र
नक्षत्र– श्रवण
योग– सिद्ध
करण– वणिज14:09 बजे तक तत्पश्चात विष्टि भद्र
वार मंगलवार
चन्द्र राशि  – मकर
सूर्य राशि – मीन
रितु – शिशिर
आयन – उत्तरायण
संवत्सर – शार्वरी
विक्रम संवत – 2077 विक्रम संवत
शाका संवत – 1942 शाका संवत
सूर्योदय – 06:20 बजे
सूर्यास्त – 18:53 बजे
दिन काल – 12 घण्टे 33 मिनट
रात्री काल – 11 घण्टे 26 मिनट
चंद्रास्त – 13:42 बजे
चंद्रोदय – 27:45 बजे
समय मानक – मोमासर (बीकानेर)
राहू काल – 15:45 – 17:19 अशुभ
यम घंटा – 09:28 – 11:02 अशुभ
गुली काल – 12:36 – 14:11
अभिजित – 12:11 -13:02 शुभ
पंचक – नहीं
दिशाशूल – उत्तर दिशा में
चोघडिया, दिन
रोग – 06:20 – 07:54 अशुभ
उद्वेग – 07:54 – 09:28 अशुभ
चर – 09:28 – 11:02 शुभ
लाभ – 11:02 – 12:36 शुभ
अमृत – 12:36 – 14:11 शुभ
काल – 14:11 – 15:45 अशुभ
शुभ – 15:45 – 17:19 शुभ
रोग – 17:19 – 18:53 अशुभ
चोघडिया, रात
काल – 18:53 – 20:19 अशुभ
लाभ – 20:19 – 21:45 शुभ
उद्वेग – 21:45 – 23:10 अशुभ
शुभ – 23:10 – 24:36* शुभ
अमृत – 24:36* – 26:02* शुभ
चर – 26:02* – 27:27* शुभ
रोग – 27:27* – 28:53* अशुभ
काल – 28:53* – 30:19* अशुभ
विशेष – 07 अप्रैल, बुधवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखें ।
एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है।
जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।
जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है ।
एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं ।इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है ।
धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है।
कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है ।
परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है। पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ ।भगवान शिवजी  ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।
एकादशी के दिन करने योग्य
एकादशी को दिया जलाके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें  ….विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l
एकादशी के दिन ये सावधानी रहे
महीने में १५-१५ दिन में  एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन जो  चावल खाता है… तो धार्मिक ग्रन्थ से एक- एक चावल एक- एक कीड़ा खाने का पाप लगता है।

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