कल होगा एकादशी व्रत, जाने आज का पंचाग व उपयोगी बातें पँ. श्रवण भारद्वाज के साथ

0

कल होगा एकादशी व्रत, जाने आज का पंचाग व उपयोगी बातें पँ. श्रवण भारद्वाज के साथ –

दिनांक – 24 मार्च 2021
वार – बुधवार
तिथि – दशमी 10:22 बजे तक तत्पश्चात एकादशी शुरू
व्रत – एकादशी व्रत कल एकादशी उदय तिथि में होगा
पक्ष – शुक्ल
माह – फाल्गुन
नक्षत्र – पुष्य
योग – अतिगंड
करण – गर 10:22 बजे तक तत्पश्चात वणिज
चन्द्र राशि – कर्क
सूर्य राशि – मीन
रितु – शिशिर
आयन – उत्तरायण
संवत्सर – शार्वरी
विक्रम संवत – 2077 विक्रम संवत
शाका संवत – 1942 शाका संवत

सूर्योदय – 06:34 बजे
सूर्यास्त – 18:46 बजे
दिन काल – 12 घण्टे 11 मिनट
रात्री काल – 11 घण्टे 47 मिनट
चंद्रोदय – 14:11 बजे
चंद्रास्त – 28:20 बजे

राहू काल – 12:40 – 14:12 अशुभ
अभिजित – 12:16 -13:05 अशुभ
पंचक – नहीं
दिशाशूल – उत्तर दिशा में
समय मानक – मोमासर (बीकानेर)

चोघडिया, दिन

लाभ – 06:35 – 08:06 शुभ
अमृत – 08:06 – 09:37 शुभ
काल – 09:37 – 11:09 अशुभ
शुभ – 11:09 – 12:40 शुभ
रोग – 12:40 – 14:12 अशुभ
उद्वेग – 14:12 – 15:43 अशुभ
चर – 15:43 – 17:15 शुभ
लाभ – 17:15 – 18:46 शुभ

चोघडिया, रात

उद्वेग – 18:46 – 20:15 अशुभ
शुभ – 20:15 – 21:43 शुभ
अमृत – 21:43 – 23:11 शुभ
चर – 23:11 – 24:40* शुभ
रोग – 24:40* – 26:08* अशुभ
काल – 26:08* – 27:37* अशुभ
लाभ – 27:37* – 29:05* शुभ
उद्वेग – 29:05* – 30:33* अशुभ

ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।

दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है। बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। इस दिन गणेशजी की पूजा अर्चना से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

बुधवार को सभी ग्रहो के राजकुमार बुध देव की आराधना करने से ज्ञान मिलता है, वाकपटुता में प्रवीणता आती है, धन लाभ होता है ।

अभिजीत मुहूर्त – बुधवार को वर्जनीय होता हैं अशुभ माना गया हैं।

बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाने तथा रात को सोते समय फिटकरी से दाँत साफ करने से आर्थिक पक्ष मजबूत होता है ।

तिथि के स्वामी – दशमी तिथि के स्वामी यमराज जी और एकादशी तिथि के स्वामी भगवान विश्व देव जी है।

नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- पुष्य नक्षत्र के देवता देव गुरु बृहस्पति और स्वामी शनि देव जी है ।

दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है । इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा/हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।

यात्रा शकुन-हरे फल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।

आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।

आज का उपाय-किसी बटुक को धर्मशास्त्र भेंट करें।

वनस्पति तंत्र उपाय- अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।

विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। एकादशी को चावल और दाल नहीं खाना चाहिए। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। पूर्णा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल व कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन और धर्म प्रदान करने वाली तिथि माना जाता है। इस तिथि में वाहन खरीदना एवं सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये अत्यंत शुभ माना जाता है।

दशमी तिथि के देवता यमराज जी हैं। यह दक्षिण दिशा के स्वामी है। इनका निवास स्थान यमलोक है।

शास्त्रों के अनुसार यमराज जी मृत्यु के देवता कहे गए हैं। यह भगवान सूर्य और उनकी पत्नी संज्ञा के पुत्र है, यमुना अर्थात (यमी) इनकी जुड़वां बहन और मनु इनके भाई कहे गए है।

यमराज की पत्नी का नाम देवी धुमोरना तथा इनके पुत्र का नाम कतिला है।

यमराज जी का वाहन महिष / भैंसे को माना गया हैं। वे समस्त जीवों के शुभ अशुभ कर्मों का निर्णय करते हैं।

इस दिन इनकी पूजा करने, इनसे अपने पापो के लिए क्षमा माँगने से जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं, निश्चित ही सभी रोगों से छुटकारा मिलता है, नरक के दर्शन नहीं होते है अकाल मृत्यु के योग भी समाप्त हो जाते है। इस तिथि को धर्मिणी भी कहा गया है। समान्यता यह तिथि धर्म और धन प्रदान करने वाली मानी गयी है ।

दशमी तिथि में नया वाहन खरीदना शुभ माना गया है। इस तिथि को सरकार से संबंधी कार्यों का आरम्भ किया जा सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here