विडम्बना – कर्मचारी के अभाव में बिना धणी डांगरो जैसी स्थिति, भगवान भरोसे गांव की पेयजल आपूर्ति

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समाचार गढ़ 19 सितम्बर 2021, श्रीडूंगरगढ़। एक तरफ जहां सरकार आमजन को सुलभ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लाखो करोड़ो रूपए पानी की तरह बहा कर विकास के बड़े बड़े दावे किये जा रहे हैं। तो दूसरी तरफ धरातल पर आमजन को किस प्रकार सुलभ पेयजल उपलब्ध हो रहा है ये देखने को मिल रहा श्री डूंगरगढ़ उपखंड मुख्यालय के गांव सातलेरा में जहां गांव की पेयजल आपूर्ति का एक मात्र नलकूप जिसका कोई धणी धोरी नजर नहीं आ रहा है।
कर्मचारी के अभाव में दो सौ पचास घरों की आबादी वाले गांव का एक मात्र नलकूप वर्तमान में जलदाय विभाग की घोर लापरवाही के चलते संक्रमण दौर से गुजर रहा अपनी दुर्दशा के आंसु बहा रहा कर्मचारी की बाट जोह रहा सरकार से गुहार लगा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पेयजल आपूर्ति के नाम पर एकमात्र सार्वजनिक नलकूप है। वर्तमान में इस नलकूप पर कोई भी कर्मचारी नहीं है। जिसके कारण गांव की पेयजल आपूर्ति भगवान भरोसे ही टिकी हुई है। कर्मचारी के अभाव में नलकूप के खराब हो जाने पर कोई संभालने वाला भी नहीं है।
ग्रामीणों ने इस नलकूप की संज्ञा बिना धणी को डांगरो से की है। अर्थात जिस पशु का कोई धणी धोरी नहीं होता वह दर-दर की ठोकरें खाता फिरता रहता है वैसा ही हाल इस नलकूप का हो गया है। जब जो चाहे नलकूप को चालू कर देता है। जो जब चाहे बंद कर देता है। आम ग्रामीणों के हाथ में कुआ चालू बंद करने की जिम्मेदारी आ गई है। कुएं के खराब होने पर कोई सुध लेने वाला नही है। छोटी मोटी कोई तकनीकी खराबी आने पर ग्रामीणों को खुद ही अपने स्तर पर जान जोखिम में डालकर दुरुस्त करनी पड़ती है।
ग्रामीण नरेश कुमार, दौलत राम, जीवन दास स्वामी, गौरी शंकर, विश्वजीत सिंह, आशाराम, विजयपाल, ओम राणावत आदि ने बताया कि वर्तमान में गांव का एकमात्र सार्वजनिक नलकूप संबंधित विभाग की घोर लापरवाही के चलते अव्यवस्था से गुजर रहा है। वर्तमान में इस नलकूप की दशा बिना लगाम का घोड़े जैसी हो गई है।
ग्रामीणों ने जलदाय विभाग के जिम्मेदारों सहित स्थानीय प्रशासन से गांव के नलकूप पर स्थाई कर्मचारी को लगाने की मांग की है।

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