दिनांक 10 अप्रेल 2021 का पंचांग व विशेष बातें जानें पं. श्रवण भारद्वाज के साथ

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दिनांक – 10 अप्रेल 2021
वार – शनिवार
तिथि – चतुर्दशी
पक्ष – कृष्ण
माह – चैत्र
नक्षत्र – पूर्वभाद्रपदा 06:45 बजे तक तत्पश्चात उत्तराभाद्रपद नक्षत्र शुरू
योग– ब्रह्म
करण – विष्टि भद्र 17:12 बजे तक तत्पश्चात शकुनि
चन्द्र राशि  – मीन
सूर्य राशि – मीन
रितु – शिशिर
आयन – उत्तरायण
संवत्सर – शार्वरी
विक्रम संवत – 2077 विक्रम संवत
शाका संवत – 1942 शाका संवत
सूर्योदय – 06:15 बजे
सूर्यास्त – 18:55 बजे
दिन काल – 12 घण्टे 40 मिनट
रात्री काल – 11 घण्टे 20 मिनट
चंद्रास्त – 17:30 बजे
चंद्रोदय – 29:58 बजे
समय मानक – मोमासर (बीकानेर)
राहू काल – 09:25 – 11:00 अशुभ
यम घंटा – 14:10 – 15:45 अशुभ
गुली काल – 06:16 – 07:50
अभिजित – 12:10 -13:01 शुभ
पंचक – लागू
दिशाशूल – पूर्व दिशा
चोघडिया, दिन
काल – 06:16 – 07:50 अशुभ
शुभ – 07:50 – 09:25 शुभ
रोग – 09:25 – 11:00 अशुभ
उद्वेग – 11:00 – 12:35 अशुभ
चर – 12:35 – 14:10 शुभ
लाभ – 14:10 – 15:45 शुभ
अमृत – 15:45 – 17:20 शुभ
काल – 17:20 – 18:55 अशुभ
चोघडिया, रात
लाभ – 18:55 – 20:20 शुभ
उद्वेग – 20:20 – 21:45 अशुभ
शुभ – 21:45 – 23:10 शुभ
अमृत – 23:10 – 24:35* शुभ
चर – 24:35* – 25:59* शुभ
रोग – 25:59* – 27:25* अशुभ
काल – 27:25* – 28:50* अशुभ
लाभ – 28:50* – 30:14* शुभ
 विशेष – चतुर्दशी और अमावस्या के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।
– सोमवती अमावस्या पर विशेष मंत्र –
जिनको पैसो की कमजोरी है वह तुलसी माता की १०८ प्रदिक्षणा करें | और  श्री हरि…. श्री हरि…. श्री हरि…. श्री हरि…. ‘श्री’ माना सम्पदा, ‘हरि’ माना भगवान की दया पाना | तो गरीबी चली जायेगी |
नकारात्मक ऊर्जा मिटाने के लिए –
 11 अप्रैल, रविवार को प्रातः 06:04 से 12 अप्रैल, सोमवार को सुबह 08:01 तक अमावस्या है।
घर में हर अमावस अथवा हर १५ दिन में पानी में खड़ा नमक (१ लीटर पानी में ५० ग्राम खड़ा नमक) डालकर पोछा लगायें । इससे नेगेटिव एनेर्जी चली जाएगी । अथवा खड़ा नमक के स्थान पर गौझरण अर्क भी डाल सकते हैं ।
– अमावस्या –
अमावस्या के दिन जो वृक्ष, लता आदि को काटता है अथवा उनका एक पत्ता भी तोड़ता है, उसे ब्रह्महत्या का पाप लगता है।
– धन-धान्य व सुख-संम्पदा के लिए–
हर अमावस्या को घर में एक छोटा सा आहुति प्रयोग करें।
सामग्री : १. काले तिल, २. जौं, ३. चावल, ४. गाय का घी, ५. चंदन पाउडर, ६. गूगल, ७. गुड़, ८. देशी कर्पूर, गौ चंदन या कण्डा।
विधि: गौ चंदन या कण्डे को किसी बर्तन में डालकर हवनकुंड बना लें, फिर उपरोक्त ८ वस्तुओं के मिश्रण से तैयार सामग्री से, घर के सभी सदस्य एकत्रित होकर नीचे दिये गये देवताओं की १-१ आहुति दें।
– आहुति मंत्र –
१. ॐ कुल देवताभ्यो नमः
२. ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः
३. ॐ ग्रह देवताभ्यो नमः
ॐ लक्ष्मीपति देवताभ्यो नमः
ॐ विघ्नविनाशक देवताभ्यो नम:
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है।
पुराणों में वर्णित है कि पिप्पलाद ऋषि ने अपने बचपन में माता पिता के वियोग का कारण शनि देव को जानकर उनपर ब्रह्म दंड से प्रहार कर दिया, जिससे शनि देव घायल हो गए। देवताओं की प्रार्थना पर पिप्पलाद ऋषि ने शनि देव को इस बात पर क्षमा किया कि शनि जन्म से लेकर 16 साल तक की आयु तक एवं उनके भक्तो को किसी को भी कष्ट नहीं देंगे। तभी से पिप्पलाद का स्मरण करने से ही शनि देव के प्रकोप से मुक्ति मिल जाती है।
शिवपुराण के अनुसार शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि की पीड़ा शान्त हो जाती है ।
तिथि का स्वामी – चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान भोलेनाथ जी है।
नक्षत्र के स्वामी –   उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के देवता अहिर्बुंधन्य देव, स्वामी शनि देव जी एवं वहीं राशि स्वामी गुरु है।
दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
आज का उपाय-शनि मंदिर में इमरती चढाएं।
वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
विशेष – चतुर्दशी को शहद और अमावस्या को मैथुन त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि क्रूरा एवं उग्रा तिथि मानी जाती है, इस तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं। इसीलिये चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये।
किसी भी पक्ष की चतुर्दशी में शुभ कार्य करना वर्जित हैं क्योंकि इसे क्रूरा कहा जाता है,  चतुर्दशी तिथि रिक्ता तिथियों की श्रेणी में आती है।

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