श्रीडूंगरगढ़ कृषि उपज मण्डी 10वें दिन भी बन्द, कृषक कल्याण शुल्क वापिस लेने की मांग लगातार जारी

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समाचारगढ़ (अशोक पारीक) श्रीडूंगरगढ़ । राजस्थान सरकार द्वारा कृषि उपज पर लगाया गया 2 प्रतिशत कृषि कल्याण शुल्क के विरोध में आज श्रीडुँगररगढ़ कृषि उपज मंडी दसवें दिन भी पुर्णतया बन्द रही। कोविड – 19 की वैश्विक महामारी के कारण लगभग डेढ़ महीने से कृषि उपज मंडी का व्यापार पुरी तरह से ठप्प पड़ा है। व्यापार संघ के अध्यक्ष श्यामसुन्दर पारीक ने कहा कि जब केंद्र सरकार ने जीएसटी लगाया तो घोषणा की गई थी। अब व्यापारी पर किसी तरह का अलग से कोई टैक्स नहीं लगाया जायेगा तो फिर यह अनुचित टैक्स व्यापारीयों पर इस आपदा कि स्थिति में अचानक से क्यों थोप दिया। यह शुल्क विधि सम्मत नहीं है। इसका सरकार के पास कोई जवाब नहीं है। उल्टे राज्य सरकार कृषि उपज मंडी के अधिकारीयों से प्रचार प्रसार करवा रही है। कि यह टैक्स किसानों पर नहीं लगेगा क्रेता से वसुलनीय होगा। व्यापार संघ इस व्यक्तब्य का पूरी तरह खंडन व विरोध करता है। क्रेता व्यापारी जब कोई माल क्रय करता है। तो खरीद किये जाने वाले माल पर सभी तरह के टैक्स माल की किमत में से घटाकर खरीद करता है। तो माल की किमत जितना सरकार ने टैक्स लगाया है। उतनी कम हो जायेगी जाहिर सी बात है। कि यह टैक्स सिधे सिधे किसानों की कृषि उपज पर लग गया। पंजाब, हरियाणा, गुजरात, मध्य प्रदेश आदि सभी पड़ोसी राज्य में यह शुल्क नहीं होने के कारण दुसरे राज्यों में यंहा का कच्चा माल बिक्री के लिए चला जायेगा व पक्का माल हमारे प्रदेश में आकर विक्रय हो जायेगा। दुसरे राज्यों में इस तरह का टैक्स नहीं होने के कारण हमारे उद्यमी व्यापारी बाहर वाले उद्योगो से प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जायेंगे व इस कारण कृषि उपज से जुड़े राज्य के उधोग धन्धे पुरी तरह चोपट हो जायेगें। एक तरफ सरकार स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए राहत पैकेज देने की बात करतीं है बड़ी बड़ी योजनाएं बनाती है। दुसरी ओर अनुचित टैक्स लगाकर जान बूझकर व्यापार व उद्योगों का गल्ला घोटने का काम कर रहीं है। इन सब विपरीत स्थितियों को देखते हुए व्यापार संघ श्रीडुँगररगढ़ इस अनुचित शुल्क को अविलंब वापिस लेने की मांग करता है। सरकार की हठ धर्मिता के खिलाफ कृषि उपज मंडी के 15 मई तक के व्यापार बन्द के आह्वान को 17 मई तक बढ़ाने की घोषणा करता है।

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