समाचार-गढ़ 4 अगस्त, 2026।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव के बीच हिंसा, मानवाधिकार उल्लंघन और प्रेस की स्वतंत्रता पर कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की आलोचना तेज हो गई है। मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल और कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (CPJ) ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग, इंटरनेट बंद करने और पत्रकारों के लापता होने पर गंभीर चिंता जताई है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि रावलकोट समेत कई इलाकों से प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग की खबरें सामने आई हैं, जो पाकिस्तान में गैरकानूनी हिंसा के लंबे इतिहास की ओर इशारा करती हैं। संगठन ने निष्पक्ष जांच, इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बहाल करने तथा मीडिया और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को प्रभावित क्षेत्रों में जाने की अनुमति देने की मांग की है।
वहीं, CPJ ने PoK में प्रेस की आजादी की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताते हुए स्वतंत्र पत्रकार राजी ताहिर और उनके सहयोगी मुहम्मद सैफ के लापता होने का मुद्दा उठाया। संस्था ने कहा कि यदि दोनों सरकारी हिरासत में हैं तो इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए और बिना कानूनी आधार के हिरासत में रखे जाने पर उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। बाद में हिरासत में लिए गए पत्रकार राजा इकराम को रिहा कर दिया गया, जबकि दो पत्रकार अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
मानवाधिकार परिषद के अनुसार, जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान अब तक कम से कम 80 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें आम नागरिकों के साथ पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर पुलिस के चार जवान भी शामिल हैं। लगातार बढ़ती हिंसा और मीडिया पर कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने पाकिस्तान से मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करने की अपील की है।









