9 से 25 सितंबर तक चला राजस्थान का निकाय चुनावी दौर, 309 निकायों में 10,245 वार्डों की तस्वीर हुई साफ
समाचार गढ़ 25 सितंबर 2026। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया 9 सितंबर से शुरू होकर 25 सितंबर 2026 तक चली। राज्य के 309 नगरीय निकायों, जिनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगर पालिकाएं शामिल हैं, में पार्षद पद के लिए दो चरणों में 9 और 11 सितंबर को मतदान हुआ। 14 सितंबर को मतगणना हुई, जबकि ईवीएम संबंधी कारणों से लंबित कुछ वार्डों में बाद में पुनर्मतदान एवं मतगणना कराई गई। इसके बाद नगर निगमों में महापौर तथा नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में सभापति-अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया हुई। 25 सितंबर को जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों के महापौर तथा सुकेत नगरपालिका के अध्यक्ष का चुनाव होने के साथ इस चुनावी दौर का बड़ा हिस्सा पूरा हुआ।
राज्य के 309 नगरीय निकायों में कुल 10,245 वार्ड हैं। इनमें से 10,244 वार्डों के परिणाम घोषित हो चुके हैं, जबकि टोंक नगर परिषद के एक वार्ड में चुनाव नहीं हुआ। शुरुआती मतगणना के बाद ईवीएम संबंधी तकनीकी दिक्कतों वाले वार्डों में पुनर्मतदान के बाद तस्वीर पूरी हुई।
10 नगर निगम, 47 परिषद और 252 पालिकाएं
इस बार राजस्थान में कुल 309 नगरीय निकायों में चुनाव हुए। इनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगर पालिकाएं हैं। करीब 1.44 करोड़ मतदाता इस चुनाव में मताधिकार के लिए पंजीकृत थे। पार्षद पद के लिए कुल 38,889 प्रत्याशी मैदान में थे। मतदान 9 और 11 सितंबर को दो चरणों में हुआ तथा 14 सितंबर को मतगणना की गई।
10,244 वार्डों में सामने आया पार्टीवार गणित
घोषित 10,244 वार्ड परिणामों में भाजपा के 4,179 पार्षद, कांग्रेस के 3,613 पार्षद और निर्दलीय 2,273 पार्षद विजयी रहे। इसके अलावा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के 63, आम आदमी पार्टी के 42, माकपा के 38, बहुजन समाज पार्टी के 19 और भारत आदिवासी पार्टी के 8 प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की।
बोर्ड गठन में भी दिखा अलग-अलग निकायों का गणित
14 सितंबर को पार्षदों के परिणाम सामने आने के बाद अलग-अलग निकायों में बोर्ड गठन का दौर शुरू हुआ। 21 सितंबर तक 301 निकायों के प्रमुख पदों के परिणाम घोषित हो चुके थे। इनमें भाजपा ने 197 निकायों में बोर्ड बनाए, जबकि कांग्रेस ने 94 निकायों में बोर्ड बनाया। सात निकायों में निर्दलीय अध्यक्ष बने तथा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी, आम आदमी पार्टी और माकपा के एक-एक प्रत्याशी भी अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हुए।
नगर निगमों में महापौर का चुनाव
राजस्थान के 10 नगर निगमों में महापौर पद के चुनाव भी इसी प्रक्रिया का अहम हिस्सा रहे। पहले चरण में अजमेर, अलवर, पाली और उदयपुर में भाजपा के महापौर निर्वाचित हुए, जबकि बीकानेर में कांग्रेस ने महापौर पद जीता। भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध महापौर चुने गए।
25 सितंबर को जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगमों के महापौर पद के चुनाव हुए।
जयपुर में भाजपा के सुनील कोठारी, जोधपुर में भाजपा के प्रसन्नचंद मेहता और कोटा में भाजपा की अनुसुइया गोस्वामी महापौर निर्वाचित हुईं। इसी दिन सुकेत नगरपालिका के अध्यक्ष पद का चुनाव भी हुआ, जिसमें भाजपा के जितेंद्र चोपड़ा निर्वाचित हुए।
नगर परिषद और नगर पालिकाओं में भी बदली तस्वीर
47 नगर परिषदों और 252 नगर पालिकाओं में पार्षदों के चुनाव के बाद अध्यक्ष/सभापति पद के लिए मतदान हुआ। अलग-अलग निकायों में भाजपा, कांग्रेस, निर्दलीय और अन्य दलों के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। कई निकायों में किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण अध्यक्ष पद का चुनाव पार्षदों के समर्थन और क्रॉस वोटिंग से तय हुआ। यही वजह रही कि कई जगह पार्षदों की संख्या और अध्यक्ष पद के परिणामों में अंतर दिखाई दिया।
एक निकाय में मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में
सीकर जिले की खाटूश्यामजी नगरपालिका में अध्यक्ष पद की चुनाव प्रक्रिया न्यायिक आदेश के चलते अलग स्थिति में है। यहां पहले हुए मतदान से जुड़े मामले में हाईकोर्ट के आदेश के कारण 25 सितंबर का प्रस्तावित पुनर्मतदान प्रभावित हुआ और अध्यक्ष पद का अंतिम परिणाम सामान्य निकायों की तरह जारी नहीं हो सका। इसलिए राज्य के कुल 309 निकायों का आंकड़ा लिखते समय खाटूश्यामजी को लंबित स्थिति में रखना जरूरी है।
9 सितंबर से शुरू हुआ चुनावी दौर 25 सितंबर तक पहुंचा
कुल मिलाकर राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में 309 निकाय, 10,245 वार्ड, करीब 1.44 करोड़ मतदाता और 38,889 प्रत्याशी चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा रहे। 9 और 11 सितंबर को मतदान, 14 सितंबर को मुख्य मतगणना, इसके बाद लंबित वार्डों में पुनर्मतदान एवं मतगणना और 21 से 25 सितंबर तक महापौर, सभापति एवं अध्यक्ष पदों के चुनाव के साथ प्रदेश का यह बड़ा नगरीय चुनावी दौर अपने अंतिम चरण में पहुंचा।








