समाचार-गढ़ 29 सितंबर, 2026।
Surgical Strike Explained: 29 सितंबर 2016… यह तारीख भारतीय सैन्य इतिहास की उन तारीखों में शामिल हो गई, जब भारत ने नियंत्रण रेखा (LoC) के पार जाकर आतंकियों के लॉन्च पैड्स को निशाना बनाने की कार्रवाई की। 28-29 सितंबर की दरमियानी रात भारतीय सेना के पैरा स्पेशल फोर्सेज के कमांडोज ने LoC पार की और भारत के मुताबिक आतंकियों के कई लॉन्च पैड्स पर सटीक कार्रवाई की। अगले दिन तत्कालीन DGMO लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दुनिया को इस ऑपरेशन की जानकारी दी।
इस ऑपरेशन को भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में एक अहम मोड़ के तौर पर देखा गया। बाद के वर्षों में सरकार और रणनीतिक विश्लेषणों में भी इसे सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ अधिक सक्रिय और प्रतिरोधक नीति की दिशा में बदलाव से जोड़ा गया।
सर्जिकल स्ट्राइक क्या थी?
सर्जिकल स्ट्राइक ऐसी सैन्य कार्रवाई को कहा जाता है, जिसमें किसी निर्धारित लक्ष्य को सटीक तरीके से निशाना बनाया जाता है और ऑपरेशन का दायरा सीमित रखा जाता है। 2016 में भारतीय सेना ने इसे LoC के पार मौजूद आतंकी लॉन्च पैड्स के खिलाफ की गई कार्रवाई के रूप में पेश किया था।
सेना के तत्कालीन DGMO के मुताबिक, खुफिया जानकारी मिली थी कि कुछ आतंकी टीमें LoC के पास मौजूद लॉन्च पैड्स पर जमा थीं और भारत में घुसपैठ कर आतंकी हमलों की तैयारी कर रही थीं। इन्हीं इनपुट्स के आधार पर भारतीय सेना ने कार्रवाई की।
उरी हमले के बाद लिया गया बड़ा फैसला
18 सितंबर 2016 को जम्मू-कश्मीर के उरी में भारतीय सेना के कैंप पर आतंकवादी हमला हुआ था। इस हमले में 19 भारतीय जवानों की मौत हुई। हमले में शामिल चार आतंकियों को सेना ने मार गिराया था और उनके पास से हथियार तथा दूसरे सामान बरामद किए गए थे।
उरी हमले के बाद LoC पर घुसपैठ की कोशिशों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय थीं। भारतीय सेना के मुताबिक, उस दौरान ऐसे इनपुट मिले कि कुछ आतंकी टीमें भारत में हमले के लिए LoC के पार लॉन्च पैड्स पर मौजूद थीं। 29 सितंबर को DGMO ने कहा कि इसी विश्वसनीय जानकारी के आधार पर आतंकियों की घुसपैठ को रोकने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक की गई।
उस रात क्या हुआ था?
इस ऑपरेशन के लिए भारतीय सेना की पैरा स्पेशल फोर्सेज की 4 Para और 9 Para SF यूनिट्स के कमांडोज को चुना गया था। बाद में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, कमांडोज ने अंधेरे की आड़ में अलग-अलग रास्तों से LoC पार की और आतंकी लॉन्च पैड्स तक पहुंचे।
ऑपरेशन की पूरी योजना बेहद गोपनीय रखी गई थी। उपलब्ध विवरणों के अनुसार, कमांडोज ने कई ठिकानों को निशाना बनाया और मिशन पूरा करने के बाद भारतीय सीमा में वापस लौट आए। एक पूर्व सैन्य अधिकारी ने 2026 में बताया कि कमांडोज अगली सुबह करीब 5 बजे भारतीय क्षेत्र में वापस आ गए थे।
लॉन्च पैड्स पर हुई कार्रवाई
भारतीय सेना के आधिकारिक बयान में लॉन्च पैड्स की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की गई थी। बाद की रिपोर्टों में कई लॉन्च पैड्स को निशाना बनाए जाने और सात ठिकानों तक का उल्लेख मिलता है। ऑपरेशन में ग्रेनेड और रॉकेट लॉन्चर जैसे हथियारों के इस्तेमाल की जानकारी भी बाद की रिपोर्टों में सामने आई।
भारतीय पक्ष ने इस कार्रवाई में आतंकियों को भारी नुकसान पहुंचने की बात कही थी। शुरुआती रिपोर्टों में 35 से 40 आतंकियों के मारे जाने का आंकड़ा सामने आया था। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी और पाकिस्तान ने भारतीय दावे को खारिज किया था। इसलिए इस संख्या को भारतीय पक्ष के दावे के तौर पर ही देखा जाता है।
पाकिस्तान ने क्या कहा था?
29 सितंबर 2016 को DGMO लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सर्जिकल स्ट्राइक की जानकारी दी। उन्होंने कहा था कि भारतीय सेना ने LoC के पार आतंकियों के लॉन्च पैड्स को निशाना बनाया और आतंकियों की घुसपैठ की कोशिश को रोकने के लिए कार्रवाई की गई।
दूसरी ओर, पाकिस्तान ने भारतीय सेना के LoC पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक करने के दावे को स्वीकार नहीं किया। पाकिस्तान ने घटना को सीमा पर हुई गोलीबारी के तौर पर बताया। इस तरह ऑपरेशन को लेकर दोनों देशों के आधिकारिक दावे अलग-अलग रहे।
भारत की रणनीति में क्यों अहम रहा यह ऑपरेशन?
2016 की सर्जिकल स्ट्राइक को सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई के तौर पर नहीं देखा गया। इसके बाद भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में सीमा पार मौजूद आतंकी ठिकानों के खिलाफ सीधे और सीमित सैन्य विकल्प के इस्तेमाल पर ज्यादा जोर दिखाई दिया।
सरकार के बाद के आधिकारिक दस्तावेजों में 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक को भारत की आतंकवाद विरोधी रणनीति में एक अहम मोड़ बताया गया है। इसे सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सक्रिय कार्रवाई और प्रतिरोध की नीति से जोड़ा गया।
यही वजह है कि 28-29 सितंबर 2016 की रात को भारतीय सैन्य इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है। उरी हमले के बाद लिया गया यह फैसला भारत की सुरक्षा नीति में उस बदलाव का प्रतीक बना, जिसमें आतंकवादी घुसपैठ की तैयारी को सीमा के उस पार जाकर निशाना बनाने का विकल्प भी सामने आया।








