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वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश, किरेन रिजिजू ने दी सफाई

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समाचार गढ़, 2 अप्रेल। लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश करने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि संसदीय इतिहास में किसी बिल पर इतनी व्यापक चर्चा नहीं हुई। सरकार ने 97 लाख से अधिक सुझावों का अध्ययन किया और संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में इस विधेयक पर विस्तार से मंथन किया गया। 25 राज्यों के वक्फ बोर्ड, कानून विशेषज्ञों और 284 प्रतिनिधिमंडलों के सुझावों को भी इसमें सम्मिलित किया गया।

2013 में बदले गए थे वक्फ कानून

रिजिजू ने कहा कि 2013-14 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस सरकार ने वक्फ अधिनियम में बदलाव किए थे, जिससे कई सवाल खड़े होते हैं। 2013 में सिखों, हिंदुओं, पारसियों और अन्य को भी वक्फ बनाने की अनुमति दी गई थी, जबकि वक्फ की अवधारणा विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के लिए होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह संशोधन कांग्रेस सरकार द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए किया गया था।

वक्फ बोर्ड संपत्ति प्रबंधन नहीं करता

उन्होंने स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड केवल वक्फ संपत्तियों की निगरानी करता है, लेकिन उनका प्रत्यक्ष प्रबंधन नहीं करता। कांग्रेस सरकार ने वक्फ बोर्ड को विशिष्ट बनाया, जिससे शिया और सुन्नी बोर्डों में बंटवारा हो गया। साथ ही, एक प्रावधान जोड़ा गया कि वक्फ कानून अन्य सभी कानूनों पर प्रभावी होगा, जो स्वीकार्य नहीं हो सकता।

धार्मिक स्थलों के प्रबंधन से कोई संबंध नहीं

रिजिजू ने यह भी स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड का मस्जिद, मंदिर या किसी अन्य धार्मिक स्थल के प्रबंधन से कोई लेना-देना नहीं है। यह केवल वक्फ संपत्तियों की देखरेख करता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई इस अंतर को समझना नहीं चाहता, तो इसका कोई समाधान नहीं है।

UPA सरकार ने 123 संपत्तियां वक्फ बोर्ड को दीं

उन्होंने आरोप लगाया कि 2014 के चुनाव से कुछ ही दिन पहले UPA सरकार ने 123 प्रमुख सरकारी संपत्तियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड को स्थानांतरित कर दिया था। रिजिजू ने सवाल उठाया कि जब आचार संहिता लागू होने वाली थी, तो इतनी महत्वपूर्ण संपत्तियों को वक्फ बोर्ड को देने की क्या आवश्यकता थी? उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने ऐसा करके चुनावी लाभ उठाने की कोशिश की, लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया।

विधेयक में संशोधन क्यों जरूरी था?

रिजिजू के अनुसार, 2013 में वक्फ बनाने के नियमों में बदलाव कर दिया गया था, जबकि 1995 तक केवल मुसलमान ही वक्फ बना सकते थे। अब इस विधेयक के जरिए 1995 के प्रावधानों को बहाल कर दिया गया है, ताकि केवल उन्हीं व्यक्तियों को वक्फ बनाने का अधिकार हो, जिन्होंने कम से कम पांच वर्षों तक इस्लाम का पालन किया हो।

वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग क्यों नहीं?

उन्होंने कहा कि भारत में 8.72 लाख वक्फ संपत्तियां हैं, लेकिन इसके बावजूद मुस्लिम समुदाय में गरीबी बनी हुई है। यदि वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग किया जाता, तो इससे गरीब मुस्लिम समुदाय को बड़ा लाभ मिल सकता था।

बिल किसी धर्म के खिलाफ नहीं

रिजिजू ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि यह विधेयक न लाया जाता, तो संसद भवन भी वक्फ संपत्ति घोषित किया जा सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर मोदी सरकार नहीं होती, तो और भी कई प्रमुख संपत्तियां वक्फ बोर्ड को दी जा सकती थीं।

वक्फ बोर्ड में महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य

विधेयक के अनुसार, वक्फ बोर्ड में 10 मुस्लिम सदस्य, 3 सांसद, 2 पेशेवर और 4 गैर-मुस्लिम सदस्य होंगे। साथ ही, बार काउंसिल से एक सदस्य और कम से कम 2 महिला सदस्य अनिवार्य होंगे।

रेलवे और रक्षा भूमि की तुलना वक्फ से नहीं की जा सकती

उन्होंने कहा कि रेलवे ट्रैक, स्टेशन और अन्य बुनियादी ढांचा राष्ट्र की संपत्ति है, न कि केवल भारतीय रेलवे की। इसी तरह, रक्षा भूमि राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य प्रशिक्षण के लिए है, जिसे वक्फ संपत्ति के समान नहीं माना जा सकता। भारत में विश्व की सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां हैं, लेकिन उनके उचित उपयोग पर सवाल बना हुआ है।

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