समाचार गढ़ 3 अप्रैल 2026 जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने एक अहम फैसले में तलाकशुदा पत्नी को मिलने वाले स्थायी गुजारा भत्ते को 25 लाख रुपए से बढ़ाकर 40 लाख रुपए कर दिया है। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने 1 अप्रैल को यह निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया कि गुजारा भत्ता किसी प्रकार की विलासिता का साधन नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार है।
यह मामला जोधपुर निवासी शोभा कंवर और डॉ. नरपतसिंह के बीच लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद से जुड़ा है। दोनों की शादी 23 अप्रैल 1994 को मारवाड़ जंक्शन में हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी और उनके दो पुत्र हैं। पत्नी ने 2 मार्च 2015 को फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी।
महिला का आरोप है कि वर्ष 2004 में पति और उसके परिवार ने उस पर पिता की संपत्ति बेचकर पैसे लाने का दबाव बनाया। विरोध करने पर 1 मई 2009 को उसके साथ मारपीट की गई और बच्चों सहित घर से निकाल दिया गया। इस संबंध में दहेज प्रताड़ना, मारपीट और अन्य गंभीर धाराओं में एफआईआर भी दर्ज है।
फैमिली कोर्ट, जोधपुर ने तलाक की डिक्री देते हुए पति को 25 लाख रुपए स्थायी गुजारा भत्ता और भुगतान होने तक 45 हजार रुपए मासिक भरण-पोषण देने का आदेश दिया था। इस फैसले को पत्नी ने अपर्याप्त बताते हुए 2 करोड़ रुपए की मांग की, जबकि पति ने इसे अत्यधिक बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी।
सुनवाई के दौरान पत्नी पक्ष ने दलील दी कि पति एक सरकारी ईएनटी विशेषज्ञ हैं और उनकी मासिक आय वेतन सहित निजी प्रैक्टिस आदि से 8 से 10 लाख रुपए तक है, जबकि पत्नी के पास आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं है और वह पिछले 16 वर्षों से बच्चों का अकेले पालन-पोषण कर रही है।
वहीं, पति की ओर से कहा गया कि पत्नी उच्च शिक्षित वकील है और स्वयं भी आय अर्जित करने में सक्षम है। साथ ही, पति पर वृद्ध मां और विकलांग भाई की जिम्मेदारी भी है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि पति की प्रमाणित आय लगभग 2 लाख रुपए मासिक है और उसके पास स्वयं का मकान व पैतृक संपत्ति भी है। दूसरी ओर, पत्नी के पास न तो स्थायी आय का प्रमाण है और न ही अपना आवास।
अंततः खंडपीठ ने पत्नी की अपील को स्वीकार करते हुए और पति की अपील को खारिज करते हुए स्थायी गुजारा भत्ता बढ़ाकर 40 लाख रुपए निर्धारित कर दिया।












