समाचार गढ़ 11 जून 2026 बीकानेर। पीबीएम अस्पताल में डिलीवरी के बाद कुछ महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले को लेकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने गुरुवार को विस्तृत प्रेस वार्ता कर सरकार और चिकित्सा विभाग का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि बीकानेर की इस घटना की तुलना कोटा के किसी मामले से नहीं की जा सकती, क्योंकि दोनों की परिस्थितियां और चिकित्सकीय जटिलताएं अलग-अलग हैं।
मंत्री ने बताया कि अस्पताल में भर्ती अधिकांश महिलाएं पहले से ही गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं से जूझ रही थीं। चिकित्सकों ने उनकी जान बचाने के लिए लगातार प्रयास किए और विशेषज्ञों की निगरानी में उपचार किया जा रहा है।
सबसे गंभीर मरीज 20 वर्षीय प्रीति को बताया गया, जिसे 15 मई को पीबीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मंत्री के अनुसार महिला को दृष्टि संबंधी समस्या, अत्यधिक उच्च रक्तचाप तथा गर्भावस्था के दौरान गंभीर जटिलताएं थीं। चिकित्सकीय परिस्थितियों को देखते हुए गर्भस्थ शिशु का समयपूर्व गर्भसमापन करना पड़ा। बाद में सीजेरियन ऑपरेशन किया गया। महिला की किडनी और लीवर प्रभावित थे तथा अन्य कई स्वास्थ्य मानक भी चिंताजनक स्थिति में थे। वर्तमान में उसका उपचार आईसीयू में जारी है और हालत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
तारा देवी के मामले में मंत्री ने बताया कि यह उनकी तीसरी डिलीवरी थी। डिलीवरी के कुछ घंटों बाद अत्यधिक रक्तस्राव होने के कारण उनकी स्थिति गंभीर हो गई थी। गांव के अस्पताल से पीबीएम रेफर किए जाने के बाद विशेषज्ञों की देखरेख में उपचार शुरू किया गया। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है और उन्हें जल्द अस्पताल से छुट्टी मिलने की संभावना है।
तीसरी महिला ईमरती की डिलीवरी सामान्य हुई थी, लेकिन बाद में किडनी संबंधी समस्या सामने आई। जांच के बाद उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में भर्ती कर उपचार दिया गया। मंत्री ने बताया कि संक्रमण नियंत्रित है और मरीज की हालत स्थिर बनी हुई है।
वहीं 19 वर्षीय रहिला की दूसरी डिलीवरी के बाद अत्यधिक रक्तस्राव और अन्य चिकित्सकीय जटिलताएं उत्पन्न हुईं। उपचार के दौरान उन्हें नेफ्रोलॉजी आईसीयू में भर्ती कर डायलिसिस दिया गया। वर्तमान में उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है, हालांकि कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का उपचार अभी जारी है।
चिकित्सा मंत्री ने कहा कि सभी मामलों की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम लगातार निगरानी कर रही है तथा मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।









