समाचार-गढ़ 25 जुलाई 2026। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के बढ़ते मामलों पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार कानून को और कड़ा बनाने की तैयारी में है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पब्लिक एग्जामिनेशंस (संशोधन) विधेयक, 2026 का प्रस्ताव रखा है, जिसका उद्देश्य सरकारी भर्ती और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है।
प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सजा पहले से कहीं अधिक सख्त होगी। न्यूनतम सजा 3 साल से बढ़ाकर 5 साल और अधिकतम सजा 5 साल से बढ़ाकर 10 साल किए जाने का प्रस्ताव है। वहीं अधिकतम जुर्माने की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की जा सकती है।
यदि किसी परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी या सर्विस प्रोवाइडर की भूमिका परीक्षा घोटाले में सामने आती है, तो उस पर 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। साथ ही ऐसे संस्थानों पर 8 साल तक सार्वजनिक परीक्षाएं आयोजित करने पर प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर कंपनी के निदेशक या वरिष्ठ अधिकारियों को भी कम से कम 5 साल की जेल और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
संगठित तरीके से पेपर लीक कराने वाले गिरोहों के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई का प्रस्ताव है। ऐसे मामलों में कम से कम 7 साल की जेल और कम से कम 10 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया जा सकेगा।
जांच और न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसे दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी। इसके अलावा, हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की योजना है, जहां केवल परीक्षा से जुड़े मामलों की सुनवाई होगी। लक्ष्य है कि चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर फैसला सुनाया जाए।
सरकार का मानना है कि इन प्रस्तावित बदलावों से पेपर लीक पर प्रभावी अंकुश लगेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता तथा छात्रों का भरोसा दोनों मजबूत होंगे।








