समाचार-गढ़ 12 अगस्त, 2026।
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के अंतिम चरण में सरकार का विधायी कामकाज तो आगे बढ़ा, लेकिन लगातार हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही प्रभावित रही। सत्र के पहले 17 दिनों में 12 नए बिल पेश किए गए, जिनमें से 7 दोनों सदनों से पारित हो चुके हैं।
ज्यादातर बिल बिना चर्चा के हुए पास
इन 7 बिलों में से सिर्फ 2 पर सदन में विस्तृत चर्चा हो सकी। बाकी बिल विपक्ष के विरोध और हंगामे के बीच पारित हुए। हाल के दिनों में भी लोकसभा ने कुछ अहम बिल बिना बहस के पास किए हैं।
17 दिनों में लोकसभा सिर्फ 16 घंटे चली
हंगामे का असर संसद के कामकाज पर साफ दिखाई दिया। 17 दिनों में लोकसभा की कार्यवाही करीब 16 घंटे 12 मिनट, जबकि राज्यसभा करीब 28 घंटे 30 मिनट चली। यानी तय समय की तुलना में दोनों सदनों का कामकाज काफी कम रहा।
लोकसभा में स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सिर्फ 36 मिनट में 7 बिल पास कर दिए गए। यानी औसतन एक बिल को मंजूरी देने में करीब 5 मिनट लगे।
प्रश्नकाल पर सबसे ज्यादा असर
हंगामे का सबसे बड़ा असर प्रश्नकाल पर पड़ा। लोकसभा में अब तक प्रश्नकाल करीब 20 मिनट ही चल पाया। इससे सांसदों के पास सरकार से सीधे सवाल पूछने और जवाब मांगने का सीमित मौका रहा।
सत्र की शुरुआत भी विपक्षी विरोध के कारण हंगामेदार रही थी और पहले ही दिन प्रश्नकाल नहीं हो सका था।
सत्र खत्म होने में अब सिर्फ एक दिन
18वीं लोकसभा का यह मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चल रहा है और कुल 19 बैठकें निर्धारित हैं। अब सरकार के पास लंबित विधायी काम निपटाने के लिए सिर्फ अंतिम दिन बचा है।
यानी इस सत्र की तस्वीर दो हिस्सों में दिखती है—बिलों को मंजूरी देने की रफ्तार तेज रही, लेकिन उन पर संसदीय बहस और सदन के कुल कामकाज का समय सीमित रहा।









