समाचार-गढ़ 12 अगस्त, 2026।
नई दिल्ली: टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 तक है, इसलिए तब तक वे कंपनी की कमान संभालते रहेंगे। उनका इस्तीफा 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की AGM से कुछ दिन पहले आया है।
5 साल के एक्सटेंशन पर नहीं बन पाई सहमति
चंद्रशेखरन के मुताबिक, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने उनके कार्यकाल को अगले 5 साल के लिए बढ़ाने की सिफारिश की थी। यह प्रस्ताव टाटा संस के बोर्ड के सामने भी रखा गया, लेकिन एक बोर्ड सदस्य के समर्थन नहीं देने के कारण सर्वसम्मति नहीं बन सकी।
करीब छह महीने तक इस मामले पर कोई अंतिम फैसला नहीं होने के बाद चंद्रशेखरन ने पद छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि फरवरी 2027 के बाद नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी है, क्योंकि ग्रुप के कई महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रोजेक्ट अहम दौर में हैं।
नोएल टाटा से मतभेद की चर्चा
चंद्रशेखरन के कार्यकाल के विस्तार को लेकर टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के साथ मतभेद की बात सामने आई है। इसके अलावा ग्रुप के नए कारोबारों में बड़े निवेश, उनके प्रदर्शन और टाटा संस की भविष्य की रणनीति को लेकर भी अलग-अलग राय होने की खबरें हैं।
एविएशन और डिजिटल कारोबार पर बढ़ा दबाव
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने एयरलाइन, डिजिटल, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी जैसे नए क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। हालांकि, इनमें कुछ कारोबार अभी दबाव में हैं।
एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस को वित्त वर्ष 2026 में मिलाकर ₹22,238 करोड़ का घाटा हुआ, जबकि टाटा डिजिटल का घाटा ₹4,974 करोड़ रहा। इन नए कारोबारों के प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठे हैं।
टाटा संस की लिस्टिंग पर भी अलग राय
टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध किया जाए या इसे निजी कंपनी के रूप में रखा जाए, इस मुद्दे पर भी टाटा ट्रस्ट्स के भीतर अलग-अलग विचार सामने आए हैं। यह भी दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक मतभेद का एक महत्वपूर्ण मुद्दा माना जा रहा है।
चंद्रशेखरन के 9 साल में टाटा ग्रुप का विस्तार
2017 में चेयरमैन बनने के बाद चंद्रशेखरन ने टाटा ग्रुप को कई नए क्षेत्रों में विस्तार दिया।
- रेवेन्यू: FY20 में ₹7.89 लाख करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹16.24 लाख करोड़
- मुनाफा: ₹32,000 करोड़ से बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़
- लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप: ₹9.31 लाख करोड़ से बढ़कर ₹24.39 लाख करोड़
एविएशन से लेकर सेमीकंडक्टर और बैटरी तक, इस दौरान टाटा ग्रुप ने कई रणनीतिक क्षेत्रों में कदम बढ़ाया।
अब कौन चुनेगा अगला चेयरमैन?
टाटा संस के अगले चेयरमैन के चयन के लिए एक चयन समिति उम्मीदवारों पर विचार करेगी। इसमें टाटा ट्रस्ट्स के नामित सदस्य, टाटा संस बोर्ड का एक सदस्य और एक स्वतंत्र बाहरी सदस्य शामिल होते हैं।
समिति की सिफारिश के बाद टाटा संस का बोर्ड अंतिम नियुक्ति पर फैसला करता है।
टाटा ग्रुप, टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स में अंतर
- टाटा ग्रुप: टाटा नाम से संचालित अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों का समूह।
- टाटा संस: टाटा ग्रुप की मुख्य होल्डिंग कंपनी, जो कई प्रमुख कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है।
- टाटा ट्रस्ट्स: परोपकारी ट्रस्टों का समूह, जिसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है।
चंद्रशेखरन का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब टाटा ग्रुप अपने नए कारोबारों के विस्तार और भविष्य की रणनीति के महत्वपूर्ण दौर में है। इसलिए अब सबसे बड़ा सवाल फरवरी 2027 के बाद टाटा संस की कमान किसके हाथ में जाएगी।









