समाचार-गढ़ 7 सितंबर, 2026।
Rajasthan News: नगर पालिका चुनाव के बीच मतदान से ठीक पहले एक ऐसा सियासी घटनाक्रम सामने आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। नाथद्वारा के वार्ड 23 में नामांकन वापसी के दिन शुरू हुआ विवाद अब मतदान से महज तीन दिन पहले एक बार फिर सुर्खियों में है।
मामला तब और दिलचस्प हो गया, जब वार्ड 23 से भाजपा प्रत्याशी दिनेश प्रजापत ने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में वोट मांगने की बात कह दी। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को खुद से अधिक योग्य बताया और उनके पक्ष में मतदान की अपील करने की बात कही। साथ ही भाजपा की ओर से उनका नामांकन जल्दबाजी में करवाए जाने का आरोप भी लगाया।
नामांकन वापसी के दिन क्या हुआ था?
नाथद्वारा के वार्ड 23 में यह सियासी ड्रामा 3 सितंबर को नामांकन वापसी के अंतिम दिन शुरू हुआ था। दिनेश प्रजापत के नामांकन वापस लेने की सूचना सामने आने के बाद भाजपा कार्यकर्ता उन्हें रोकने के लिए मौके पर पहुंचे।
इस दौरान भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच गहमागहमी हो गई और स्थिति झड़प तक पहुंच गई। मामला बढ़ता देख पुलिस ने मोर्चा संभाला और दिनेश प्रजापत को अपने साथ ले गई।
पुलिस पर भी लगाए आरोप
अब मतदान से ठीक पहले दिनेश प्रजापत ने सामने आकर पूरे घटनाक्रम को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उनका कहना है कि वह 3 सितंबर को नामांकन वापस लेने के लिए पहुंचे थे, लेकिन पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई।
दिनेश प्रजापत के मुताबिक, पुलिस उन्हें कई घंटों तक गाड़ी में घुमाती रही। इसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने का फैसला किया।
उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस प्रत्याशी के लिए वोट मांगेंगे, क्योंकि उनके अनुसार कांग्रेस प्रत्याशी उनसे अधिक योग्य हैं। उन्होंने वार्ड 23 के मतदाताओं से भी कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने की अपील करने की बात कही।
भाजपा के सामने खड़े हुए कई सवाल
मतदान से ऐन पहले भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी का कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में खुलकर सामने आना पार्टी संगठन के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इस घटनाक्रम ने प्रत्याशी चयन से लेकर स्थानीय स्तर पर पार्टी की चुनावी रणनीति तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
वार्ड 23 में पहले से चल रहा विवाद अब इस नए घटनाक्रम के बाद और ज्यादा चर्चा में आ गया है। चुनाव से ठीक पहले प्रत्याशी के रुख में आए बदलाव का असर मतदान पर कितना पड़ेगा, इस पर भी राजनीतिक नजरें टिकी हैं।
भीतरघात की चिंता भी बढ़ी
निकाय चुनाव में पार्टियों के सामने विपक्ष से मुकाबले के साथ-साथ भीतरघात और नाराज कार्यकर्ताओं को साधने की चुनौती भी रहती है। टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों और उनके समर्थकों का रुख कई सीटों पर चुनावी समीकरण प्रभावित कर सकता है।
नाथद्वारा के वार्ड 23 में सामने आया यह घटनाक्रम इसी लिहाज से भाजपा के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। अब पार्टी के सामने एक ओर अपने अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने की चुनौती है, तो दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर उपजे विवाद को संभालना भी जरूरी है।
मतदान में अब सिर्फ तीन दिन बाकी हैं। ऐसे में वार्ड 23 का यह बदला हुआ सियासी समीकरण चुनावी नतीजे पर क्या असर डालता है, यह देखने वाली बात होगी।









