समाचार-गढ़ 17 सितंबर, 2026।
नई दिल्ली: रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका के बढ़ते दबाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अपना रुख साफ किया है। अमेरिकी संसद के प्रतिनिधि सभा ने रूस और ईरान पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा ऐसा बिल पास किया है, जिसमें भारत और चीन जैसे देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को मिल सकता है। अब यह बिल आगे की प्रक्रिया के लिए बढ़ गया है।
भारत ने कहा है कि देश की 140 करोड़ से ज्यादा आबादी की ऊर्जा जरूरतें उसकी प्राथमिकता हैं। भारत अलग-अलग देशों से तेल और गैस की खरीद जारी रखेगा और वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के आधार पर अपने फैसले करेगा।
रूस से तेल खरीद पर भारत का क्या रुख है?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग स्रोतों से कच्चा तेल खरीदता है। सरकार का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है और इस दिशा में बाजार की स्थिति को ध्यान में रखकर फैसले लिए जाएंगे।
रूस से तेल खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ महीनों में उच्च स्तर पर बातचीत भी हुई है।
भारत का यह रुख ऐसे समय आया है जब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने वाले विधेयक को मंजूरी दी है। इस बिल में उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है जो रूस से तेल खरीदना जारी रखते हैं।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को लेकर भी जताई चिंता
भारत ने संकेत दिया है कि रूस से तेल खरीद पर लगाए जाने वाले व्यापक प्रतिबंधों का असर केवल भारत-अमेरिका संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
भारत का कहना है कि वह अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा। साथ ही, सरकार नए घटनाक्रम के संभावित असर का आकलन भारतीय व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर करेगी।
अमेरिका के नए बिल में क्या है?
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर 2026 को “Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026” को 262-159 मतों से पारित किया। बिल रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों पर दबाव बढ़ाने के साथ-साथ उन देशों पर टैरिफ लगाने की व्यवस्था करता है जो रूस से जुड़े ऊर्जा कारोबार को जारी रखते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें टैरिफ 100% तक हो सकता है। बिल अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास आगे की कार्रवाई के लिए जाएगा।
यानी फिलहाल 100% टैरिफ भारत पर लागू होने की बात नहीं है; अमेरिकी संसद से पारित बिल में ऐसा टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। भारत ने इसी संभावित दबाव के बीच अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है।









