समाचार-गढ़ 18 अक्टूबर, 2026।
Pakistan Hunger Crisis: पाकिस्तान में आर्थिक मुश्किलों के बीच खाद्य संकट भी गंभीर बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता संगठन एक्शन अगेंस्ट हंगर की नई रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान दुनिया के उन 10 देशों में शामिल है, जहां भूख और खाद्य असुरक्षा का संकट सबसे ज्यादा केंद्रित है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में पाकिस्तान के करीब 1.06 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत पड़ सकती है। महंगाई, गरीबी, जलवायु आपदाओं और मानवीय सहायता के लिए घटती फंडिंग ने कमजोर परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
दुनिया के 10 बड़े खाद्य संकट वाले देशों में पाकिस्तान
विश्व खाद्य दिवस से पहले जारी Ten Largest Global Food Crises 2026 रिपोर्ट में पाकिस्तान को दुनिया के 10 सबसे गंभीर खाद्य संकट प्रभावित देशों में शामिल किया गया है। इस सूची में नाइजीरिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, सूडान, यमन, अफगानिस्तान, म्यांमार, बांग्लादेश, पाकिस्तान, दक्षिण सूडान और सीरिया शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन 10 देशों में करीब 17.7 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। वहीं, दुनिया के 47 देशों और क्षेत्रों में 2025 के दौरान करीब 26.6 करोड़ लोग गंभीर भूख से प्रभावित हुए। पिछले एक दशक में गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करने वाले लोगों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।
पाकिस्तान में 1.06 करोड़ लोगों को मदद की जरूरत क्यों?
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में करीब 1.06 करोड़ लोग 51 ग्रामीण क्षेत्रों में गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। आर्थिक संकेतकों में कुछ सुधार के बावजूद कमजोर परिवारों के लिए पर्याप्त भोजन जुटाना अब भी मुश्किल बना हुआ है।
महंगाई और बेरोजगारी के कारण लोगों की खरीदने की क्षमता प्रभावित हुई है। कम आमदनी वाले परिवारों के लिए भोजन के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और दूसरी बुनियादी जरूरतों का खर्च उठाना भी चुनौती बन रहा है। कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों की आजीविका पर भी प्रतिकूल परिस्थितियों का असर पड़ा है।
पेट भरने के लिए परिवारों को उठाने पड़ रहे मुश्किल कदम
रिपोर्ट में बताया गया है कि आर्थिक दबाव और पर्याप्त सहायता नहीं मिलने के कारण कुछ परिवार अपने भोजन में कटौती कर रहे हैं। कई परिवार खर्च चलाने के लिए अपनी कमाई के साधन या संपत्तियां बेचने को मजबूर हो रहे हैं। कुछ मामलों में बच्चों को स्कूल से निकालने जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं।
ऐसे फैसलों से परिवारों को तत्काल आर्थिक राहत मिल सकती है, लेकिन लंबे समय में इससे कुपोषण, गरीबी और बच्चों की शिक्षा प्रभावित होने का खतरा बढ़ता है। खाद्य संकट का असर केवल भोजन की उपलब्धता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवारों की सेहत और भविष्य पर भी पड़ता है।
बाढ़, सूखा और भीषण गर्मी ने बढ़ाई परेशानी
पाकिस्तान में खाद्य सुरक्षा के लिए जलवायु से जुड़ी आपदाएं भी बड़ी चुनौती हैं। बार-बार आने वाली बाढ़, सूखा, भीषण गर्मी और मानसून की अनिश्चित बारिश से खेती, पशुपालन और ग्रामीण आजीविका प्रभावित होती है।
आपदाओं से बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने के साथ कई समुदायों के लिए भोजन और जरूरी सेवाओं तक पहुंच भी मुश्किल हो जाती है। ग्रामीण तथा आपदा प्रभावित इलाकों में साफ पीने के पानी, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और पोषण कार्यक्रमों की सीमित उपलब्धता संकट को और गंभीर बना सकती है।
दुनिया में खाद्य संकट बढ़ा, सहायता के लिए फंडिंग घटी
रिपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर खाद्य संकट से निपटने के लिए उपलब्ध सहायता में कमी पर भी चिंता जताई है। एक्शन अगेंस्ट हंगर के मुताबिक, खाद्य, कृषि और पोषण सहायता के लिए संकटग्रस्त क्षेत्रों में मिलने वाली मानवीय फंडिंग 2022 से 2025 के बीच करीब 59 फीसदी घट गई।
जबकि जरूरतमंद लोगों की संख्या बढ़ रही है, सहायता के संसाधनों में कमी राहत पहुंचाने के प्रयासों को मुश्किल बना रही है।
पाकिस्तान के आंकड़े बताते हैं कि आर्थिक सुधार के दावों के बावजूद बड़ी आबादी के सामने भोजन और बुनियादी जरूरतों का संकट बना हुआ है। हालांकि, रिपोर्ट में 1.06 करोड़ लोगों के लिए सहायता की जरूरत का अनुमान है; इसका अर्थ यह नहीं कि देश के सभी प्रभावित लोग अकाल की स्थिति में हैं।








