समाचार-गढ़ 18 अक्टूबर, 2026।
Gwalior News: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण ट्रक हादसे ने कई परिवारों को उजाड़ दिया। हादसे में 15 लोगों की मौत की खबर के बाद रविवार सुबह मृतकों के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस के बाहर जुटे परिवारों ने इलाज में देरी और सही समय पर सूचना नहीं देने के आरोप लगाए। कुछ परिजनों का कहना है कि उन्हें रातभर यही बताया जाता रहा कि उनके बच्चे का इलाज चल रहा है, लेकिन बाद में उसकी मौत की जानकारी मिली। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में शोक के साथ आक्रोश का माहौल रहा।
हादसे के बाद अस्पताल में क्यों भड़के परिजन?
रविवार, 18 अक्टूबर की सुबह मृतकों के परिवार बड़ी संख्या में पोस्टमार्टम हाउस के बाहर पहुंचे। परिजनों ने अस्पताल और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि हादसे के बाद घायलों की स्थिति के बारे में उन्हें समय पर और स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
कुछ परिवारों ने दावा किया कि उन्हें रातभर बताया गया कि उनके परिजन का इलाज चल रहा है। बाद में उन्हें पता चला कि उनकी मौत हो चुकी है। इस जानकारी के बाद परिजनों ने नाराजगी जताई और जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा।
‘हादसा 2 बजे हुआ तो अस्पताल 4 बजे क्यों लाया गया?’
एक पीड़ित परिजन ने इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने में देरी का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि यदि हादसा रात करीब 2 बजे हुआ था, तो घायल को अस्पताल में 4 बजे क्यों लाया गया। उनका कहना था कि समय पर इलाज मिलता तो शायद उनके बच्चे की जान बच सकती थी।
परिजनों के मुताबिक, वे देर रात तक अस्पताल में इस उम्मीद में बैठे रहे कि उनके बच्चे का इलाज चल रहा है। बाद में उन्हें उसकी मौत की जानकारी मिली। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनसे कागजात पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा जा रहा था, जबकि उन्हें पहले ही सही जानकारी दी जानी चाहिए थी।
ये आरोप परिजनों की ओर से लगाए गए हैं। इलाज और सूचना देने में देरी की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बेटे को खोने वाली मां ने पुलिस से पूछे सवाल
हादसे में गौरव नाम के युवक की मौत के बाद उसकी मां किरण ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि उन्हें अपने बेटे की स्थिति को लेकर सही जानकारी नहीं मिली। उन्होंने पुलिसकर्मियों के व्यवहार और बेटे को पोस्टमार्टम हाउस भेजे जाने की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए।
एक अन्य महिला ने बताया कि उन्हें पहले कहा गया था कि उनका बच्चा ठीक है और उसका इलाज चल रहा है। लेकिन बाद में फोन पर उसकी मौत की सूचना मिली। महिला ने आरोप लगाया कि उन्हें बच्चे से मिलने तक नहीं दिया गया और प्रशासन की ओर से सही जानकारी नहीं दी गई।
दिव्यांश की मां ने पूछा- बेटी को परिवार को खोजने क्यों नहीं दिया?
हादसे में अपने बेटे दिव्यांश को खोने वाली मां ने भी अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि उन्हें हादसे की जानकारी सुबह करीब 6 बजे मिली। परिवार के दूसरे सदस्य भी हादसे से प्रभावित हुए थे।
दिव्यांश की मां का आरोप है कि उनकी बेटी परिवार के सदस्यों को खोजने गई थी, लेकिन पुलिस ने उसे ऐसा करने से रोक दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब परिवार के लोग लापता थे, तो उन्हें तलाशने में मदद क्यों नहीं की गई।
परिजनों की इन शिकायतों के बीच अस्पताल और पुलिस की ओर से घटना के बाद की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के नतीजे सामने आना बाकी हैं।
शीतला माता मंदिर के पास कैसे हुआ हादसा?
यह दुर्घटना शनिवार और रविवार की दरमियानी रात ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के पास हुई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, धान से भरा एक ट्रक अनियंत्रित होकर मंदिर की ओर जा रहे श्रद्धालुओं के बीच घुस गया। ट्रक ने कई लोगों को कुचल दिया और आगे जाकर मंदिर के प्रवेश द्वार तथा बाहरी दीवार से टकरा गया।
हादसे में कई लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में श्रद्धालु घायल हुए। शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों और घायलों की संख्या अलग-अलग बताई गई है। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू की है। शुरुआती जांच में ट्रक में तकनीकी खराबी की आशंका भी जताई गई है।
हादसे के बाद उठे कई सवाल
ग्वालियर की इस दुर्घटना के बाद अब केवल ट्रक के अनियंत्रित होने का कारण ही नहीं, बल्कि घायलों को अस्पताल पहुंचाने, परिजनों को समय पर जानकारी देने और लापता लोगों को खोजने में समन्वय जैसे मुद्दे भी चर्चा में हैं।
परिजनों ने प्रशासन से जवाब मांगा है। वहीं, हादसे के कारणों और परिवारों की ओर से लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही साफ हो सकेगी।








