समाचार-गढ़ 19 अक्टूबर, 2026।
Russian Oil Export: रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर पश्चिमी देशों की नजरें बनी हुई हैं, लेकिन इसी बीच भारतीय रिफाइनरियों से पश्चिमी बाजारों तक तेल उत्पादों का निर्यात बढ़ गया है। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2026 में भारत, तुर्किये और ब्रुनेई की उन रिफाइनरियों से यूरोपीय संघ, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड को भेजे गए तेल उत्पादों का मूल्य अगस्त के मुकाबले 43% बढ़कर 1 अरब यूरो हो गया। इनमें अनुमानित 29.5 करोड़ यूरो के उत्पाद रूसी कच्चे तेल से तैयार किए गए थे। इस निर्यात में भारत की जामनगर रिफाइनरी की अहम भूमिका रही।
जामनगर रिफाइनरी से पश्चिमी देशों को कितने का निर्यात?
गुजरात स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी सितंबर में पश्चिमी देशों को रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों की आपूर्ति करने वाली प्रमुख रिफाइनरियों में शामिल रही। CREA की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में यूरोपीय संघ के बंदरगाहों पर पहुंची सात खेपों में से छह जामनगर से भेजी गई थीं।
अमेरिका को भी जामनगर से सबसे अधिक मूल्य के तेल उत्पाद भेजे गए। रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में इस रिफाइनरी ने अमेरिका को करीब 12.2 करोड़ यूरो के तेल उत्पादों का निर्यात किया। जुलाई से सितंबर 2026 के बीच जामनगर के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी 32% थी।
यूरोपीय संघ सबसे बड़ा खरीदार, अमेरिका दूसरे नंबर पर
सितंबर में भारत, तुर्किये और ब्रुनेई की रिफाइनरियों से तेल उत्पाद खरीदने वाले पश्चिमी बाजारों में यूरोपीय संघ सबसे आगे रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, इन देशों ने सितंबर में:
- यूरोपीय संघ: 66.7 करोड़ यूरो के तेल उत्पाद खरीदे।
- ऑस्ट्रेलिया: 16.8 करोड़ यूरो के उत्पाद खरीदे।
- अमेरिका: 15.4 करोड़ यूरो के उत्पाद खरीदे।
- न्यूजीलैंड: 1.9 करोड़ यूरो के उत्पाद खरीदे।
कुल मिलाकर इन बाजारों को भेजे गए उत्पादों का मूल्य करीब 1 अरब यूरो रहा, जो अगस्त की तुलना में 43% अधिक था। हालांकि, यह आंकड़ा इन तीन देशों की रिफाइनरियों से हुए कुल निर्यात का है; इसमें से रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों का अनुमानित मूल्य 29.5 करोड़ यूरो था।
रूसी तेल से बने उत्पादों पर प्रतिबंध, फिर भी कैसे पहुंच रही खेप?
यूरोपीय संघ ने रूसी कच्चे तेल से तैयार तेल उत्पादों के आयात पर 21 जनवरी 2026 से प्रतिबंध लागू किया था। इसके बावजूद CREA की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में रूसी कच्चे तेल को प्रोसेस करने वाली रिफाइनरियों से सात खेपें यूरोपीय संघ के बंदरगाहों पर उतारी गईं।
रिपोर्ट में इसे मौजूदा प्रतिबंधों के क्रियान्वयन से जुड़ी एक चुनौती बताया गया है। तीसरे देश में रूसी कच्चे तेल को रिफाइन करके बनाए गए उत्पादों की उत्पत्ति और उनके आयात पर नियमों को लागू करना इस व्यवस्था का अहम पहलू है।
CREA ने सुझाव दिया है कि प्रतिबंधों को केवल उत्पाद के देश के आधार पर देखने के बजाय रिफाइनरी के स्तर पर भी लागू किया जाए। उसके प्रस्ताव के अनुसार, पिछले छह महीनों में रूसी कच्चे तेल को प्रोसेस करने वाली रिफाइनरियों से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने पर विचार किया जा सकता है। यह CREA का सुझाव है, यूरोपीय संघ की मौजूदा नीति का विवरण नहीं।
पश्चिमी देशों को निर्यात बढ़ा, भारत का रूसी तेल आयात घटा
दिलचस्प बात यह है कि सितंबर में पश्चिमी देशों को तेल उत्पादों का निर्यात बढ़ने के साथ भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात घट गया। CREA के मुताबिक, सितंबर में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात अगस्त के मुकाबले 13% कम रहा। यह लगातार दूसरा महीना था, जब आयात में गिरावट दर्ज की गई, और अप्रैल 2026 के बाद यह सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
प्रमुख रिफाइनरियों में आयात की स्थिति इस प्रकार रही:
- जामनगर रिफाइनरी: रूसी कच्चे तेल का आयात 27% घटा।
- IOC की पारादीप रिफाइनरी: आयात में 21% की कमी आई।
- नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी: आयात 8% घटा।
- HMEL के मुंद्रा ऑयल टर्मिनल: आयात में 74% की गिरावट आई।
- कोच्चि रिफाइनरी: आयात 32% घटा।
आयात घटने के बावजूद वाडिनार सितंबर में भारत की सबसे बड़ी रूसी कच्चा तेल आयातक रिफाइनरी बन गई। वहीं, IOC के मुंद्रा ऑयल टर्मिनल पर सितंबर में 5.70 लाख टन रूसी कच्चा तेल आया, जबकि अगस्त में वहां कोई आयात दर्ज नहीं हुआ था।
रूस से 4.1 अरब यूरो का जीवाश्म ईंधन खरीदने वाला दूसरा देश भारत
रूसी कच्चे तेल के आयात में गिरावट के बावजूद भारत सितंबर 2026 में रूस का दूसरा सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन खरीदार रहा। CREA की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने उस महीने रूस से कुल 4.1 अरब यूरो के जीवाश्म ईंधन खरीदे।
इसमें 3.6 अरब यूरो का कच्चा तेल शामिल था, जो कुल खरीद का लगभग 88% था। इसके अलावा भारत ने 30.9 करोड़ यूरो का कोयला और 16.1 करोड़ यूरो के तेल उत्पाद आयात किए। इस सूची में चीन पहले स्थान पर रहा। दिसंबर 2022 से सितंबर 2026 के बीच रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 37% और चीन की 50% रही।
भारत के लिए क्यों अहम है यह स्थिति?
भारत रूसी कच्चे तेल को रिफाइन करके तैयार पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी करता है। ऐसे में कच्चे तेल की खरीद, रिफाइनिंग और तैयार ईंधन की बिक्री—तीनों का असर उसके ऊर्जा व्यापार पर पड़ता है।
CREA के आंकड़े बताते हैं कि सितंबर में पश्चिमी बाजारों को तेल उत्पादों का निर्यात बढ़ा, जबकि भारत की रूसी कच्चे तेल की खरीद कम हुई। हालांकि, इन दोनों रुझानों से अपने आप यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पश्चिमी देशों को भेजे गए सभी उत्पाद रूसी तेल से बने थे या भारत ने प्रतिबंधों का उल्लंघन किया। रिपोर्ट के अनुसार, निर्यात किए गए कुल उत्पादों में रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों का अनुमानित मूल्य 29.5 करोड़ यूरो था।








