समाचार गढ़ 23 अक्टूबर 2026।
भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने कहा है कि राज्य में कई जगहों पर चीनी सैनिकों के साथ आमना-सामना जारी है। इस बीच भारत ने सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। अगले तीन वर्षों में सीमावर्ती चौकियों पर भूमिगत शेल्टर बनाने, ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक को मजबूत करने और जवानों को आधुनिक युद्ध की चुनौतियों के लिए प्रशिक्षित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।
3 साल में सीमा पर बनेंगे अंडरग्राउंड बंकर
ITBP प्रमुख शत्रुजीत कपूर ने राजस्थान के अलवर में आयोजित एक कार्यक्रम में जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक युद्ध का तरीका तेजी से बदल रहा है। ऐसे में केवल पारंपरिक हथियारों और जमीन के ऊपर बने ढांचों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। हवाई हमलों और भारी गोलाबारी की स्थिति में जमीन के ऊपर मौजूद इमारतें निशाना बन सकती हैं, इसलिए भूमिगत सुरक्षा ढांचे तैयार करना जरूरी है।
ITBP की योजना के तहत अगले तीन वर्षों में चीन सीमा पर मौजूद जमीन के ऊपर के ढांचों के अनुरूप भूमिगत शेल्टर विकसित किए जाएंगे। इसके लिए विभिन्न कंपनियों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जा चुके हैं। डिजाइन और निर्माण की प्रक्रिया में मिले अनुभव के आधार पर आगे इनका विस्तार किया जाएगा।
इन शेल्टरों में वेंटिलेशन, पानी की निकासी और शौचालय जैसी सुविधाएं रखने की योजना है, ताकि मुश्किल हालात में भी जवान सुरक्षित रह सकें और लंबे समय तक अपनी चौकियों पर तैनात रह सकें।
ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर खर्च होंगे करोड़ों रुपये
सीमा पर निगरानी और आधुनिक युद्ध की तैयारी के लिए ITBP ड्रोन तकनीक पर भी खास जोर दे रही है। शत्रुजीत कपूर के मुताबिक, बल को आधुनिकीकरण के लिए मिले 400 करोड़ रुपये में से करीब 70 प्रतिशत राशि ड्रोन क्षमताओं को मजबूत करने के लिए निर्धारित की गई है। इसके अलावा, 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये की प्रस्तावित व्यापक आधुनिकीकरण योजना में से 1,000 करोड़ रुपये ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए रखे गए हैं।
ITBP की सीमावर्ती बटालियनों में ड्रोन प्लाटून गठित की गई हैं। जवानों को ड्रोन उड़ाने और उनका संचालन करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बल स्वदेशी स्तर पर ड्रोन विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहा है।
इन तकनीकों से दुर्गम पहाड़ी इलाकों में निगरानी बेहतर करने, संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने और ड्रोन से पैदा होने वाले खतरों का मुकाबला करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, निगरानी की वास्तविक क्षमता मौसम, इलाके और उपलब्ध उपकरणों पर भी निर्भर करेगी।
असाफिला में भारत-चीन सैनिकों के बीच क्यों बना हुआ है तनाव?
सीमा पर ITBP की तैयारियों के बीच अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के तकसिंग क्षेत्र के पास असाफिला में जारी गतिरोध भी चर्चा में है। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी सूत्रों ने बताया कि जुलाई के आखिर से इस इलाके में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में नियमित गश्त के दौरान दोनों देशों के सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ था। इसके बाद चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के जवान दोबारा इलाके में पहुंचे और ऊंचाई वाले क्षेत्र में तंबू लगाए। सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया कि ये तंबू उस सीमा रेखा से करीब 6 से 7 किलोमीटर अंदर हैं, जिसे भारत अपनी सीमा का हिस्सा मानता है।
यहां यह समझना जरूरी है कि भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के कुछ हिस्सों को लेकर अलग-अलग धारणाएं हैं। इसलिए किसी इलाके में सैनिकों की मौजूदगी या गश्त को लेकर किए गए दावों को आधिकारिक जानकारी और उपलब्ध रिपोर्टों के संदर्भ में देखना चाहिए।
बातचीत के बावजूद नहीं थमा आमना-सामना
सीमा पर तनाव के बीच दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत भी हुई है। 6 सितंबर को अरुणाचल प्रदेश के वाचा-दमाई बॉर्डर पर्सनल मीटिंग पॉइंट पर पूर्वी क्षेत्र में पहली बार कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई थी। इसके बावजूद ITBP प्रमुख ने हालिया बयान में कई स्थानों पर चीनी सैनिकों के साथ आमना-सामना जारी रहने की बात कही।
इस घटनाक्रम से साफ है कि सीमा पर बातचीत और सुरक्षा तैयारियां साथ-साथ चल रही हैं। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि मौजूदा गतिरोध कब पूरी तरह खत्म होगा।
शौर्य कमांडो और नई ट्रेनिंग से मजबूत होगी तैयारी
ITBP अपनी पारंपरिक सीमा सुरक्षा भूमिका के साथ ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में लड़ने की क्षमता भी बढ़ा रही है। इसके लिए शौर्य कमांडो यूनिट तैयार की गई है, जिसने अरुणाचल में जारी आमने-सामने की स्थितियों के दौरान अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। अब इस यूनिट का विस्तार कर इसे और मजबूत बनाने की योजना है।
इसके अलावा, गलवान जैसी नजदीकी झड़पों से निपटने के लिए ‘स्ट्राइक’ नाम का प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। ITBP प्रमुख के मुताबिक, इस प्रशिक्षण से जवानों को ऐसी परिस्थितियों में बेहतर प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार किया जाएगा।
कुल मिलाकर, अंडरग्राउंड शेल्टर, ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम, शौर्य कमांडो तथा नए प्रशिक्षण कार्यक्रम ITBP के आधुनिकीकरण का हिस्सा हैं। अरुणाचल में जारी गतिरोध के बीच इन कदमों का उद्देश्य सीमा पर तैनात जवानों की सुरक्षा और परिचालन क्षमता को मजबूत करना है।







