समाचार-गढ़ 19 अक्टूबर, 2026।
गोवा की राजधानी पणजी में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर ‘हिंदुत्व मुर्दाबाद’ के नारे लगाए जाने के मामले में करीब 300 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। यह प्रदर्शन 11 अक्टूबर को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं और मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विरोध में किया गया था। पुलिस के अनुसार, शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है।
पणजी में प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ?
जानकारी के मुताबिक, 11 अक्टूबर को पणजी के आजाद मैदान में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया गया था। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित गड़बड़ियों और मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले में ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें।
इस प्रदर्शन में नागरिक संगठनों, कार्यकर्ताओं, नेताओं और छात्रों ने हिस्सा लिया था। बाद में प्रदर्शन के दौरान लगाए गए कथित नारों को लेकर मामला पुलिस तक पहुंच गया।
किन आरोपों में दर्ज हुई FIR?
पणजी पुलिस के इंस्पेक्टर विजयकुमार चोडनकर के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने कथित तौर पर ‘मुर्दाबाद, मुर्दाबाद, हिंदुत्व मुर्दाबाद’ जैसे नारे लगाए। पुलिस का कहना है कि इस तरह की नारेबाजी से धार्मिक सद्भाव बिगड़ने और हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप है।
स्थानीय निवासी रामप्रसाद केलकर की शिकायत और सोशल मीडिया पर प्रसारित प्रदर्शन के वीडियो का हवाला देते हुए मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 196 और 299 के तहत FIR दर्ज की है। ये धाराएं समूहों के बीच वैमनस्य बढ़ाने और धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने से संबंधित हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि FIR दर्ज होने का मतलब आरोप साबित होना नहीं है। मामले में पुलिस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही आरोपों पर स्थिति स्पष्ट होगी।
प्रदर्शन की अनुमति को लेकर भी उठा था सवाल
रिपोर्टों के अनुसार, जिला प्रशासन ने आजाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद कुछ प्रदर्शनकारियों के मैदान में प्रवेश करने पर पुलिस ने सात लोगों को हिरासत में लिया था। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने क्या कहा?
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने पहले कहा था कि घटना की जांच की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया था कि राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फिलहाल, यह मामला CEC के खिलाफ प्रदर्शन, कथित नारेबाजी और धार्मिक सद्भाव से जुड़े आरोपों के कारण चर्चा में है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ और आरोपों के संबंध में आगे क्या कार्रवाई की जाती है।








