समाचार गढ़ 2 अप्रैल 2026। राज्य में पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर तय समय सीमा से बाहर आदेश जारी करने पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा की खंडपीठ ने पूर्व विधायक संयम लोढ़ा की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्त को अवमानना नोटिस जारी किए हैं।
समय सीमा पर कोर्ट का सवाल
अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का कार्यक्रम तय समय सीमा से बाहर कैसे जारी किया गया। कोर्ट ने आयोग को 4 सप्ताह के भीतर इस पर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता का पक्ष
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पुनीत सिंघवी ने अदालत को बताया कि सरकार और चुनाव आयोग जानबूझकर चुनाव टालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इसे हाईकोर्ट के आदेश की सीधी अवमानना बताया। आयोग द्वारा 22 अप्रैल तक फाइनल मतदाता सूची जारी करने का कार्यक्रम तय किया गया है।
तय समय में चुनाव संभव नहीं
इस कार्यक्रम को देखते हुए यह स्पष्ट है कि निकाय चुनाव हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित 15 अप्रैल की समय सीमा के भीतर किसी भी स्थिति में पूरे नहीं हो पाएंगे।
सरकार का रुख
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि सरकार चुनाव आगे बढ़ाने के लिए प्रार्थना पत्र दायर करने जा रही है। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह बाद की स्थिति है, फिलहाल यह स्पष्ट किया जाए कि चुनाव आयोग ने ऐसा कार्यक्रम कैसे जारी किया।
कोर्ट का निर्देश
हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को 4 सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है। हालांकि, इस मामले में कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी नहीं किया है।
पहले दिए गए थे स्पष्ट आदेश
राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को 439 याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। साथ ही, 31 दिसंबर 2025 तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया था।
सुप्रीम कोर्ट की भी टिप्पणी
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान भी शीर्ष अदालत ने राज्य में 15 अप्रैल तक चुनाव कराने की आवश्यकता पर जोर दिया था।












