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समाज आलोचना की मशीन बन चुका है, सकारात्मकता को मिलना चाहिए मंच— नूजल इस्लाम काज़ी

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वरिष्ठ शिक्षक ने लेख के माध्यम से युवाओं में बढ़ रही नकारात्मकता पर जताई चिंता

समाचार गढ़, सातलेरा, 8 अगस्त 2025।
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, सातलेरा में वरिष्ठ अध्यापक नूजल इस्लाम काज़ी ने समाज में बढ़ती आलोचना प्रवृत्ति और युवाओं में इससे उपज रहे मानसिक तनाव को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अपने विचारों को एक प्रभावशाली लेख के माध्यम से साझा किया है, जो मौजूदा सामाजिक स्थिति पर एक गंभीर प्रश्न उठाता है।

काज़ी ने लिखा है कि आज का युवा सामाजिक दबाव और आलोचनात्मक माहौल का शिकार हो रहा है। न केवल युवा, बल्कि हर व्यक्ति कहीं न कहीं समाज की आलोचना का शिकार बन रहा है। उन्होंने कहा कि यह आलोचना अब बाह्य दबाव समूह के रूप में कार्य कर रही है, जिससे व्यक्ति के भीतर चिंता और तनाव बढ़ रहा है।

उन्होंने वर्तमान समाज की तुलना आलोचना के वटवृक्ष से करते हुए कहा कि गली-मोहल्ले, नुक्कड़, चौराहे — सभी स्थान आलोचना के केंद्र बन चुके हैं। दुर्भाग्य की बात यह है कि सकारात्मक बातों या प्रशंसा योग्य कार्यों पर चर्चा ही नहीं हो रही, जबकि हर जगह केवल लोगों की कमियों और कमजोरियों को ही केंद्र में रखकर बुराई की जा रही है।

काज़ी ने लिखा कि समाज अच्छी बातों को नजरअंदाज कर रहा है, जबकि अच्छाई की भी मार्केटिंग होनी चाहिए ताकि लोग उनसे प्रेरणा ले सकें। उन्होंने यह भी कहा कि आज का समाज आलोचना को ही चर्चा का केंद्र बना रहा है, जो अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति समाज में नैतिक मूल्यों के पतन का कारण बन रही है। जब कोई अच्छा कार्य होता है, तो उसे नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन एक बुरे कार्य को चर्चा का विषय बनाकर बार-बार दोहराया जाता है। इससे समाज में नकारात्मकता बढ़ रही है और व्यक्ति मानसिक रूप से कमजोर हो रहा है।

काज़ी ने समाज से आह्वान किया है कि अगर कोई अच्छा कार्य हो रहा है, तो उसे चर्चा का विषय बनाया जाए, ताकि अच्छाई का प्रचार-प्रसार हो। और यदि कोई गलत कार्य कर रहा है, तो उसे सीधे और व्यक्तिगत रूप से समझाया जाए, न कि गली-मोहल्लों की नुक्कड़ सभा में सार्वजनिक आलोचना कर उसकी बुराई को प्रचारित किया जाए।

“समाज का यह रवैया युवाओं को खुद से दूर कर रहा है, उन्हें यह महसूस हो रहा है कि समाज अब सिर्फ आलोचना करने वाली मशीन बन गया है,” — लेख के अंत में काज़ी ने लिखा।

उन्होंने सभी से आग्रह किया कि हम सभी इस समाज के अभिन्न अंग हैं और हमें इसके वातावरण को सकारात्मक बनाने में भूमिका निभानी चाहिए।

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