समाचार-गढ़, 23 अगस्त 2023 (गौरीशंकर तावणियां)। कोई समय था जब रामलीला का मंचन होता था तो दर्शक हर्ष के साथ रामलीला देखने के लिए उमड़ पड़ते थे। लेकिन अब रामलीला की जगह धीरे-धीरे पाश्चात्य संस्कृति ने अपना असर दिखना शुरू कर दिया है। जिसके कारण भारतीय संस्कृति का एक अभिनव अंग विलुप्त होता जा रहा है। इसी बीच एक भारतीय संस्कृति को साकार करने वाली खबर श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के गांव सातलेरा से मिल रही है। सातलेरा गांव में श्री शिव रामलीला मंडली बिनादेसर के तत्वाधान में पिछले तीन दिनों से रामलीला का मंचन किया जा रहा है।आठ दिनों तक चलने वाली इस रामलीला को देखने के लिए दिनोंदिन दर्शकों की संख्या बढ़ती जा रही है।शिव रामलीला मंडली के उमाशंकर ने बताया कि रामलीला के तीसरे दिन लक्ष्मण भरत संवाद का दृश्य दर्शाया गया। आज शाम बुधवार को सजीव झांकियो के बीच सीता स्वयंवर का दृश्य दर्शाया जायेगा। कलाकार उमाशंकर ने बताया कि कोई समय था कि जब गांव में रामलीला का मंचन होता तो दर्शक उमड़ जाते थे लेकिन वर्तमान में पाश्चात्य संस्कृति का साफ असर देखने को मिल रहा है जिसके कारण भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत रामलीला जैसे मंचन को देखने मे दर्शक कम भाग ले रहे हैं।लोग धीरे धीरे पाश्चात्य संस्कृति की और खींचे जा रहे हैं जो भारतीय संस्कृति के लिए खतरे का संकेत है।












