दिनांक 14- 06-2023 के पंचांग के साथ जाने और भी कई खास बातें राजगुरू पंडित रामदेव उपाध्याय के साथ
एकादशी व्रत आज! भूलकर भी न करें ये गलती
श्री गणेशाय नम:
तिथि वारं च नक्षत्रं
योगो करणमेव च ।
पंचागं श्रृणुते नित्यं
श्रीगंगा स्नानं फलं लभेत् ।।
शास्त्रों के अनुसार नित्य पंचांग के तिथि, वार, नक्षत्र ,योग ,करण आदि पांच अंगों को सुनने से गंगा स्नान के बराबर फल मिलता है अतः नित्य पंचांग अवश्य सुनना चाहिए।। *आज का पंचांग*
दिनांक- 14/ 06 /2023
श्री डूंगरगढ़
अक्षांश – 28:06
रेखांश – 74:04
पंचांग
विक्रम संवत् – 2080
शक संवत् – 1945
* ऋतु – ग्रीष्म
* अयन- उत्तरायण
* मास – आषाढ़
* पक्ष- कृष्ण
* तिथि- एकादशी प्रातः 08:45 बजे उपरांत द्वादशी
* वार- बुधवार
* नक्षत्र – अश्विनी दोपहर 13:37 बजे उपरांत भरणी
* योग- अतिगंड रात्रि 26:57 बजे उपरांत सुकर्मा
करण- 1 बालव- 08:45 A.M. 2. कौलव- 20:37 P.M. उपरांत तैतिल
चंद्र राशि – मेष
चंद्र बल – मेष, मिथुन, कर्क, सिंह, तुला, वृश्चिक, धनु, कुंभ, मीन
सम्वत् नाम – पिंगल
सूर्योदय – 05:45 A.M. सूर्यास्त – 07:23 P.M.
दिनमान – 13:38
रात्रिमान – 10:22 *अशुभ समय* यमगण्ड - प्रातः 7:30 से 9:00 तक राहुकाल- दोपहर 12:00 से 1:30 बजे तक
*(विशेष- राहुकाल चक्र भारत के दक्षिण संभाग में ही मान्य है दक्षिण संभाग के लोगों को शुभ कार्यो में राहु काल के समय का त्याग करना चाहिए किंतु उत्तर भारत में राहुकाल का समय शुभ कार्यों में त्यागने की आवश्यकता नहीं है । ) **
कालवेला या अर्द्धयाम
- प्रातः 09:09:30 से 10:51:45 बजे तक
- रात्रि 03:09:30 से 04:27:15 बजे तक
गुलिक काल – प्रातः 10:30 से 12:00 बजे तक
दिशा शूल – उत्तर दिशा में यात्रा विशेष वर्जित एवं यथासंभव सभी दिशाओं की यात्राओं को टालें
चौघड़िया ( दिन)
1.लाभ- प्रातः 05:45 से 07:27:15 तक
2.अमृत-प्रातः 07:27:15 से 09:09:30 तक
3.काल-प्रातः 09:09:30 से 10:51:45 तक (कालवेला निषेध)
4.शुभ-प्रातः 10:51:45 से 12:34:00 तक
5.रोग- दोपहर 12:34:00 से 02:16:15 तक(वारवेला निषेध)
6.उद्वेग-दोपहर 02:16:15 से 03:58:30 तक
7.चंचल- सायं 03:58:30 से 05:40:45 तक
8.लाभ-सायं 05:40:45 से 07:23 तक
चौघड़िया ( रात्रि)
1.उद्वेग-रात्रि 07:23 से 08:40:45 तक
2.शुभ-रात्रि;08:40:45 से 09:58:30 तक
3.अमृत-रात्रि 09:58:30 से 11:16:15 तक
4.चंचल-रात्रि 11:16:15 से 12:34:00 तक
5.रोग-रात्रि 12:34:00 से 01:51:45 तक
6.काल-रात्रि 01:51:45 से 03:09:30 तक
7.लाभ-रात्रि 03:09:30 से 04:27:15 तक(कालवेला निषेध)
8.उद्वेग-रात्रि 04:27:15 से 05:45 तक
विशेष – योगिनी एकादशी व्रत
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार योगिनी एकादशी व्रत से न केवल 88000 ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फल ही मिलता है बल्कि इस व्रत को करने से घर में सुख समृद्धि एवं शांति का भी आगमन होता है। एकादशी के दिन प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान आदि नित्य नैमित्तिक कर्म से निवृत्त होकर के स्वच्छ वस्त्र पहने एवं घर के पूजा घर की विशेष साफ-सफाई अवश्य करें। इस दिन भगवान श्री विष्णु की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराये एवं भगवान की प्रतिमा के समक्ष धूप एवं दीपक प्रज्वलित करें, भगवान को खीर या हलवे का भोग लगाएं। तत्पश्चात एक पोस्ट पर चंदन लगाकर भगवान को अर्पण करें उसके बाद एकादशी की व्रत कथा अवश्य सुने इस दिन ग्रहण करना वर्जित माना जाता है अतः आज के दिन भूल कर भी अन्न ग्रहण न करें।
राजगुरु पंडित रामदेव उपाध्याय ( शास्त्री-आचार्य ,ज्योतिष विद्, बी.ए.)
भू.पू. सहायक आचार्य
श्री ऋषिकुल संस्कृत विद्यालय
श्री डूंगरगढ़
M.N. 9829660721




















