दिनांक 15-06-2023 के पंचांग के साथ जाने और भी कई खास बातें आचार्य राजगुरू पंडित रामदेव उपाध्याय के साथ
आज शिव करेंगे आपके सभी कार्य सिद्ध जानें कैसे ?
श्री गणेशाय नम:
तिथि वारं च नक्षत्रं
योगो करणमेव च ।
पंचागं श्रृणुते नित्यं
श्रीगंगा स्नानं फलं लभेत् ।।
शास्त्रों के अनुसार नित्य पंचांग के तिथि, वार, नक्षत्र ,योग ,करण आदि पांच अंगों को सुनने से गंगा स्नान के बराबर फल मिलता है अतः नित्य पंचांग अवश्य सुनना चाहिए।। *आज का पंचांग*
दिनांक- 15/06/2023
श्री डूंगरगढ़
अक्षांश – 28:06
रेखांश – 74:04
पंचांग
विक्रम संवत् – 2080
शक संवत् – 1945
* ऋतु – ग्रीष्म
* अयन- उत्तरायण
* मास – आषाढ़
* पक्ष- कृष्ण
* तिथि- द्वादशी प्रातः 08:29 बजे उपरांत त्रयोदशी
* वार- गुरुवार
* नक्षत्र – भरणी दोपहर 14:08 बजे उपरांत कृतिका
* योग- सुकर्मा रात्रि 25:58:36 बजे उपरांत धृति
- करण- *1 तैतिल- 08:29 A.M. 2. गर- 20:44:30 P.M. उपरांत वणिज
- चंद्र राशि – मेष रात्रि 20:20 बजे उपरांत वृषभ
चंद्र बल – मेष, मिथुन,कर्क, सिंह, तुला, वृश्चिक, धनु, कुंभ,मीन रात्रि 20:20 बजे उपरांत मेष, वृषभ, कर्क, सिंह, कन्या, वृश्चिक, धनु, मकर, मीन
सम्वत् नाम – पिंगल
सूर्योदय – 05:45 A.M. सूर्यास्त – 07:23 P.M.
दिनमान – 13:38
रात्रिमान – 10:22*शुभ समय* अभिजित मुहूर्त मध्याह्न - 12:10 बजे से 12:58 तकअशुभ समय
यमगण्ड – प्रातः 6:00 से 7:30 बजे तक राहुकाल- दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक
*(विशेष- राहुकाल चक्र भारत के दक्षिण संभाग में ही मान्य है दक्षिण संभाग के लोगों को शुभ कार्यो में राहु काल के समय का त्याग करना चाहिए किंतु उत्तर भारत में राहुकाल का समय शुभ कार्यों में त्यागने की आवश्यकता नहीं है । ) **
- चंद्र राशि – मेष रात्रि 20:20 बजे उपरांत वृषभ
कालवेला या अर्द्धयाम
1. सायं 03:58:30 से 05:40:45 बजे तक
2. रात्रि- 12:34:00 से 01:51:45 बजे तक
गुलिक काल – प्रातः 9:00 से 10:30 बजे तक
दिशा शूल – दक्षिण दिशा में यात्रा वर्जित है
चौघड़िया ( दिन)
1.शुभ- प्रातः 05:45 से 07:27:15 तक
2.रोग-प्रातः 07:27:15 से 09:09:30 तक
3.उद्वेग-प्रातः 09:09:30 से 10:51:45 तक
4.चंचल-प्रातः 10:51:45 से 12:34:00 तक
5.लाभ-दोपहर 12:34:00 से 02:16:15 तक
6.अमृत-दोपहर 02:16:15 से 03:58:30 तक
7.काल-सायं 03:58:30 से 05:40:45 तक (कालवेला निषेध)
8.शुभ-सायं 05:40:45 से 07:23 तक (वार वेला निषेध)
चौघड़िया ( रात्रि)
1.अमृत-रात्रि 07:23 से 08:40:45 तक
2.चंचल-रात्रि 08:40:45 से 09:58:30 तक
3.रोग-रात्रि 09:58:30 से 11:16:15 तक
4.काल-रात्रि 11:16:15 से 12:34:00 तक
5.लाभ-रात्रि 12:34:00 से 01:51:45 तक(कालवेला निषेध)
6.उद्वेग-रात्रि 01:51:45 से 03:09:30 तक
7.शुभ-रात्रि 03:09:30 से 04:27:15 तक
8.अमृत-रात्रि 04:27:15 से 05:45 तक
विशेष – प्रदोष व्रत
आज गुरु प्रदोष के दिन भगवान शिव का पूजन, व्रत एवं कथा श्रवण करने से गुरु ग्रह अपना शुभ फल प्रदान करते हैं। प्रदोष व्रत से भगवान शिव अपने भक्तों की शत्रुओं से रक्षा करते हैं एवं खतरों से बचाते हैं। आज के दिन श्रद्धा पूर्वक इस व्रत को संपन्न करने से भगवान शिव अपने भक्तों के सभी कार्य भी सिद्ध करते हैं पौराणिक कथाओं के अनुसार देवराज इंद्र ने गुरु प्रदोष व्रत के प्रभाव से वृत्रासुर नामक असुर पर विजय प्राप्त की थी।
राजगुरु पंडित रामदेव उपाध्याय ( शास्त्री-आचार्य ,ज्योतिष विद्, बी.ए.)
भू.पू. सहायक आचार्य
श्री ऋषिकुल संस्कृत विद्यालय
श्री डूंगरगढ़
M.N. 9829660721




















