समाचार-गढ़, 19 अगस्त, श्रीडूंगरगढ़। अंकित पुगलिया की 9 दिन की तपस्या का अभिनंदन
तपस्या शरीर बल से नहीं आत्मबल से होती है – डॉक्टर साध्वी संपूर्ण यशा
स्थानीय मालू भवन में सेवा केंद्र व्यवस्थापिका डॉक्टर संपूर्ण यशा के सानिध्य में श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा द्वारा अंकित पुगलिया के 9 दिनों की तपस्या के उपलक्ष में अभिनंदन कार्यक्रम रखा गया। साध्वी संपूर्णयशा ने कहा कि भारतीय संस्कृति के प्रत्येक धर्म व दर्शन में तपस्या व संयम के महत्व को स्वीकार किया है। जैन धर्म में तपस्या को विशेष महत्व दिया गया है। मोक्ष के चार साधनों में तप को भी एक साधन माना गया है। तपस्या शरीर बल से नहीं अपितु आत्म बल से व संकल्प बाल से होती है। अंकित पुगलिया ने 9 दिनों की तपस्या कर सचमुच में हिम्मत का परिचय दिया है। परिवार समाज व नगर के गौरव को बढ़ाया है। इससे दूसरों को भी प्रेरणा मिलती रहे।
तेरापंथ सभा के मंत्री पवन कुमार सेठिया ने अपने संयोजकीय वक्तव्य में तपस्वी अंकित का परिचय देते हुए तप के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम में तेरापंथ सभा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष तुलसीराम चोरडिया, वरिष्ठ श्रावक कटक प्रवासी मोहनलाल सिंघी, तेयूप से मनीष पटवारी, महिला मंडल से मंजू देवी झाबक, अणुव्रत समिति मंत्री एडवोकेट रणवीर सिंह खींची, ओसवाल पंचायत मंत्री प्रमोद बोथरा, सुमित बरडिया, दिव्या बोथरा व रितिक बोथरा ने अपने विचारों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में साध्वी कृष्णा कुमारी ,साध्वीरिजु प्रज्ञा, साध्वी ललित रेखा, व साध्वी संपत प्रभा ने भी तप अनुमोदना में विचार व्यक्त किया।
सभी संस्थाओं की तरफ से साहित्य व धार्मिक उपकरण देखकर तपस्वी को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का मंगलाचरण साध्वी मौलिकयशा ने किया व कुशल संचालन तेरापंथी सभा के मंत्री पवन कुमार सेठिया ने किया।














