समाचार गढ़, जोधपुर, 17 सितम्बर 2025। शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (आफरी), जोधपुर में मंगलवार को प्रदेश के खुले प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए रोडमैप विकसित करने को लेकर परामर्श कार्यशाला आयोजित हुई। मुख्य अतिथि डॉ. सुमंत व्यास, निदेशक काजरी ने थार मरुस्थल को प्रगतिशील परिस्थितिकी तंत्र बताते हुए कहा कि आर्थिक गतिविधियों से हो रही क्षति को केवल पशुधन, चारागाहों एवं ओरण-गोचर क्षेत्रों के संरक्षण व विकास से ही रोका जा सकता है।
डॉ. आशुतोष कुमार त्रिपाठी, निदेशक आफरी ने कहा कि इस कार्यशाला में संवाद, सहयोग और जिम्मेदारी के साथ कार्य करते हुए खुले पारिस्थितिकी तंत्र के विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।
पॉलिसी ब्रीफ विमोचन
एट्री के सेंटर फॉर पॉलिसी डिजाइन ने सैंड एंड ग्रासेज ऑफ गोल्ड: वैल्यूइंग राजस्थान ओपन नेचुरल इकोसिस्टम फ़ॉर पीपुल, क्लाइमेट एंड बायोडाइवर्सिटी पर पॉलिसी ब्रीफ लॉन्च किया। साथ ही आफरी अनुसंधान पेम्फलेट का भी विमोचन किया गया।
तकनीकी सत्र
आफरी की भावना शर्मा, डॉ. चंदन सिंह, डॉ. सुजीत नरवरे, अंशुल ओझा, संजय सिंह, मोती कुमावत और डिम्पल ने खुले पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण के वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचारों पर व्याख्यान प्रस्तुत किए। कार्यशाला का संचालन मीता सिंह तोमर ने किया।
आपणों गांव समिति का प्रतिनिधित्व
इस कार्यशाला में बीकानेर संभाग से केवल आपणों गांव श्रीडूंगरगढ़ सेवा समिति का चयन हुआ। समिति अध्यक्ष जतनसिंह राजपुरोहित ने वनों एवं वन्यजीवों के धरातलीय कार्यों की विस्तृत जानकारी वीडियो ब्रीफिंग के माध्यम से प्रस्तुत की और थार मरुस्थल में ग्रासलैंड विकसित करने का आग्रह किया। इस प्रस्ताव पर सभी ने श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र का दौरा कर शुष्क वनों के विस्तार पर कार्य करने का आश्वासन दिया।
समिति की ओर से जतनसिंह, श्याम सैन और प्रियंक शाह ने प्रतिनिधित्व किया। देशी-विदेशी विशेषज्ञों ने समिति के कार्यों को वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में सकारात्मक व अनुकरणीय बताते हुए सराहा और समिति को वन पारिस्थितिकी तंत्र का प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम के कॉर्डिनेटर शोधार्थी करणीसिंह बिठू और शुभम कलवानी ने कहा कि बीकानेर संभाग का प्रतिनिधित्व आपणों गांव समिति ने किया, जो अत्यंत हर्ष और गर्व का विषय है।
आपणों गांव श्रीडूंगरगढ़ समिति ने संभाग का प्रतिनिधित्व किया, जोधपुर में प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण पर कार्यशाला आयोजित












