समाचार गढ़ 26 मार्च 2026। अमेरिका–इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध का आज 27वां दिन है और हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने जल्द हार नहीं मानी, तो उस पर पहले से भी अधिक तीव्र हमला किया जाएगा। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं और जरूरत पड़ने पर अमेरिका और कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। वहीं, ईरान ने अमेरिका के सीजफायर प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि वह ट्रम्प की शर्तों पर किसी भी हाल में युद्ध समाप्त नहीं करेगा और उसे अमेरिका के शांति प्रस्ताव पर भरोसा नहीं है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी साफ किया कि फिलहाल किसी प्रकार की वास्तविक बातचीत नहीं हो रही है और भले ही कुछ देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हों, लेकिन इसे बातचीत की शुरुआत नहीं माना जा सकता। मौजूदा हालात में शांति की कोई ठोस संभावना नजर नहीं आ रही है।
इसी बीच ईरान ने भारत समेत अपने मित्र देशों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दे दी है। इसमें चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान भी शामिल हैं। न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, मुंबई स्थित ईरानी कॉन्सुलेट के हवाले से यह जानकारी दी गई है। कॉन्सुलेट ने बताया कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि ‘मित्र देशों’ को इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने की छूट दी गई है। ईरान पहले भी कह चुका है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, बल्कि यह केवल उन देशों के लिए प्रतिबंधित है जो उसके खिलाफ हैं। अन्य देशों को कुछ शर्तों के साथ आवाजाही की अनुमति दी जा रही है।
होर्मुज स्ट्रेट के खुले रहने से भारत को कई बड़े फायदे मिल सकते हैं। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 85 प्रतिशत आयात करता है, जिसमें 55 से 60 प्रतिशत खाड़ी देशों से आता है और इसके लिए होर्मुज एक अहम मार्ग है। भारत प्रतिदिन लगभग 50 लाख बैरल तेल की खपत करता है, ऐसे में यह रास्ता खुला रहने से आपूर्ति बिना बाधा जारी रहेगी। युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं, लेकिन मार्ग खुलने से कीमतों में स्थिरता आने की संभावना है। इसके अलावा तनाव के चलते जहाजों का बीमा 2 से 3 गुना तक महंगा हो गया था, जो अब कम हो सकता है। साथ ही मिडिल ईस्ट से भारत आने वाले जहाजों को अब लगभग 5 से 10 दिनों में पहुंचने की सुविधा मिल सकेगी।
दूसरी ओर, अमेरिका ने ईरान को युद्ध समाप्त करने के लिए 15 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव भी भेजा है, जिसे पाकिस्तान के जरिए तेहरान तक पहुंचाया गया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इस योजना में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम के साथ-साथ होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ इस पूरी प्रक्रिया में अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।
अमेरिका द्वारा रखी गई प्रमुख शर्तों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक और परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी, यूरेनियम संवर्धन को सीमित या पूरी तरह बंद करना और मौजूदा स्टॉक को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को सौंपना शामिल है। इसके अलावा बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल कार्यक्रम में कटौती, होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलना, सभी परमाणु ठिकानों पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को बिना शर्त पहुंच देना, नतांज, फोर्डो और इस्फहान जैसे प्रमुख परमाणु केंद्रों को सीमित या समाप्त करना भी प्रस्ताव का हिस्सा है। अमेरिका ने ईरान से हिजबुल्लाह और अन्य सहयोगी संगठनों को समर्थन कम करने, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां घटाने और एक निश्चित अवधि के लिए सीजफायर लागू करने की भी मांग की है। इसके बदले में अमेरिका ने ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने, सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम में सहयोग और मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति के लिए दीर्घकालिक रोडमैप लागू करने का प्रस्ताव रखा है।











