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चंडीगढ़ में सिख कैदियों की रिहाई को लेकर प्रदर्शन, पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले और पानी की बौछार

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समाचार-गढ़ 15 अगस्त, 2026।

चंडीगढ़: सिख कैदियों की रिहाई की मांग को लेकर चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर कौमी इंसाफ मोर्चा के करीब 2,000 प्रदर्शनकारी जुटे। प्रदर्शनकारियों ने चंडीगढ़ स्थित लोकभवन की ओर मार्च करने का ऐलान किया था। इसे देखते हुए पंजाब और चंडीगढ़ पुलिस ने बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ाते हुए भारी बैरिकेडिंग की।

प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के दौरान पुलिस ने वॉटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। वहीं, प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर पथराव किए जाने की भी जानकारी सामने आई। सुरक्षा के मद्देनजर कुछ पुलिसकर्मियों को धातु की जालीदार सुरक्षा पोशाक पहनाई गई, ताकि उन्हें धारदार हथियारों से बचाया जा सके।

मोहाली बैरियर पर बढ़ाया गया सुरक्षा इंतजाम

प्रदर्शनकारियों ने दोपहर करीब 12:30 बजे मोहाली से चंडीगढ़ की ओर कूच करने का कार्यक्रम तय किया था। इसके मद्देनजर मोहाली बैरियर पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई और कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की तो बल प्रयोग किया जाएगा। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी चंडीगढ़ जाने की मांग पर अड़े रहे।

प्रदर्शनकारियों ने बताया शांतिपूर्ण विरोध

कौमी इंसाफ मोर्चा की ओर से पंजाब गवर्नर हाउस की तरफ मार्च को लेकर जगतार सिंह हवारा के पिता बापू गुरचरण सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करना लोगों का मौलिक अधिकार है।

उन्होंने दावा किया कि मोर्चा तीन साल से अधिक समय से शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही। उनके मुताबिक, स्वतंत्रता दिवस के मौके पर काले झंडे लेकर मार्च निकालने का उद्देश्य भी शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराना था।

गुरचरण सिंह ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने कभी बैरिकेड तोड़ने की कोशिश नहीं की और वे पुलिस के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं। उनका आरोप है कि अनावश्यक बैरिकेडिंग से तनाव की स्थिति पैदा हो रही है।

सिख कैदियों की रिहाई मुख्य मांग

प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग लंबे समय से हिरासत में मौजूद सिख कैदियों की रिहाई है। इसके अलावा, एक कैदी के लिए 10 दिन की पैरोल की भी मांग की जा रही है, ताकि वह गंभीर रूप से बीमार अपनी मां से मुलाकात कर सके।

मोर्चे का कहना है कि सरकार को उनकी मांगों पर बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में बाधा नहीं डालनी चाहिए।

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