समाचार-गढ़ 18 अगस्त, 2026।
दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में 20 जुलाई के CJP के संसद मार्च को गैरकानूनी बताया। पुलिस के मुताबिक, मार्च की अनुमति नहीं थी और प्रदर्शन के दौरान बैरिकेड तोड़े गए, पुलिसकर्मियों से मारपीट हुई। हालांकि पुलिस ने कहा कि हालात संभालने के लिए जरूरी बल प्रयोग किया गया, लेकिन जरूरत से ज्यादा बल नहीं इस्तेमाल किया गया।
20 जुलाई को क्या हुआ?
पुलिस के मुताबिक, जंतर-मंतर और आसपास करीब 30 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी मौजूद थे, जबकि सुरक्षा के लिए करीब 5 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। झड़प में 240 से ज्यादा पुलिसकर्मी और करीब 200 प्रदर्शनकारी घायल हुए।
पुलिस ने यह भी कहा कि प्रदर्शन में आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग शामिल थे। करीब 2,873 प्रदर्शनकारियों पर हत्या, हत्या की कोशिश, डकैती, रेप और POCSO जैसे मामले दर्ज हैं। इन मामलों की जांच SIT करेगी।
लाठी, सिविल ड्रेस और फेस रिकग्निशन पर पुलिस का जवाब
पुलिस ने कील वाली लाठियों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाओं में चुनिंदा फोटो और अधूरे वीडियो इस्तेमाल किए गए। सिविल ड्रेस में पुलिसकर्मियों की तैनाती को उसने सामान्य सुरक्षा रणनीति बताया।
फेशियल रिकग्निशन को लेकर पुलिस ने कहा कि इसका इस्तेमाल गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों की पहचान के लिए किया जाता है और सिर्फ तकनीक के आधार पर कार्रवाई नहीं होती।
अब हाईलेवल कमेटी करेगी जांच
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई और कथित ज्यादती की जांच के लिए हाईलेवल कमेटी बनाने का फैसला किया है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज, पूर्व DGP और पूर्व CBI प्रमुख समेत अन्य सदस्य शामिल होंगे।
कमेटी CCTV फुटेज, पुलिस कार्रवाई, महिला प्रदर्शनकारियों से कथित दुर्व्यवहार और पूरे घटनाक्रम की जांच करेगी। कोर्ट बुधवार को कमेटी के गठन का औपचारिक आदेश जारी करेगा।









