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नेपाल में फिर उठी हिंदू राष्ट्र की मांग, जानिए 2008 के बाद कब-कब तेज हुआ आंदोलन

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समाचार-गढ़ 21 अगस्त, 2026।

नेपाल में सुनसरी में कांवड़ यात्रा के दौरान हुई हिंसा के बाद देश को दोबारा हिंदू राष्ट्र घोषित करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। इसे लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों की ओर से प्रदर्शन किए जा रहे हैं। हालांकि, हिंदू राष्ट्र की बहाली की मांग नेपाल में नई नहीं है। 2008 के बाद से कई मौकों पर इस मुद्दे को लेकर बड़े आंदोलन हो चुके हैं।

मधेशी आयोग के संस्थापक अध्यक्ष रहे डॉ. विजय दत्त के मुताबिक, माओवादी आंदोलन के बाद 18 मई 2006 को पुनर्स्थापित प्रतिनिधि सभा ने नेपाल को धर्मनिरपेक्ष राज्य घोषित किया था। उस समय देश में राजा ज्ञानेंद्र सत्ता में थे। हालांकि, उनके अनुसार धर्मनिरपेक्षता लागू होने के बावजूद इसे लेकर जनता की राय पूरी तरह एकमत नहीं रही और समय-समय पर हिंदू राष्ट्र की बहाली की मांग उठती रही।

2008 के बाद शुरू हुए आंदोलन

नेपाल को धर्मनिरपेक्ष घोषित किए जाने के बाद 2008 से ही कुछ राजनीतिक दलों और धार्मिक संगठनों ने हिंदू राष्ट्र की पुनर्स्थापना के लिए आंदोलन शुरू कर दिए थे।

2015 में नया संविधान बनने के दौरान यह मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ गया। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी और विभिन्न हिंदू संगठनों ने देशभर में प्रदर्शन कर नेपाल को आधिकारिक तौर पर हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग की। हालांकि, प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच हुए समझौते के बाद संविधान में नेपाल को धर्मनिरपेक्ष राज्य ही रखा गया।

2023 में दुर्गा प्रसाई का आंदोलन

नवंबर 2023 में ‘राष्ट्र, राष्ट्रीयता, धर्म-संस्कृति और नागरिक बचाओ आंदोलन’ के बैनर तले दुर्गा प्रसाई और उनके समर्थकों ने काठमांडू में बड़ा प्रदर्शन किया।

इस आंदोलन में राजशाही की वापसी और नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग प्रमुख थी। प्रदर्शन के दौरान स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी। पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा।

2024 में फिर सड़कों पर उतरे समर्थक

इसके बाद फरवरी और अप्रैल 2024 में राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के नेतृत्व में काठमांडू समेत नेपाल के कई हिस्सों में रैलियां और विरोध प्रदर्शन हुए।

इन प्रदर्शनों में धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था को खत्म कर नेपाल को दोबारा हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।

मार्च 2025 में आंदोलन ने लिया हिंसक रूप

पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के बयानों और उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों के बाद मार्च 2025 में हिंदू राष्ट्र और राजशाही की मांग को लेकर आंदोलन फिर तेज हो गया।

काठमांडू में संयुक्त जन आंदोलन समिति के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के दौरान भारी हिंसा और झड़पें हुईं। स्थिति इतनी बिगड़ी कि यह मुद्दा एक बार फिर नेपाल की राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया। इस आंदोलन में दो लोगों की मौत भी हुई थी।

क्या राजनीतिक असर भी दिखा?

राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के अध्यक्ष राजेंद्र लिङ्देन का कहना है कि इन आंदोलनों का नेपाल की राजनीति पर दूरगामी असर पड़ा है।

उनके मुताबिक, हिंदू राष्ट्र समर्थक दलों ने चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत की है। उनकी पार्टी के कई नेता चुनाव जीतकर प्रतिनिधि सभा तक पहुंचे हैं और अब संसद के भीतर भी नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग उठाई जा रही है।

यानी सुनसरी की हालिया घटना के बाद शुरू हुआ प्रदर्शन किसी एक घटना तक सीमित नहीं है। नेपाल में हिंदू राष्ट्र की बहाली की मांग पिछले कई वर्षों से अलग-अलग आंदोलनों के जरिए सामने आती रही है, और हर बड़े आंदोलन के साथ यह मुद्दा वहां की राजनीति में फिर चर्चा के केंद्र में आ जाता है।

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