समाचार-गढ़ 24 अगस्त, 2026।
पटना: बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को बड़ा विस्तार देने की तैयारी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गंगा नदी के किनारे करीब 126 किलोमीटर लंबे मरीन ड्राइव की योजना का ऐलान किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब ₹70,000 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।
सरकार के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ सड़क और परिवहन सुविधाओं को मजबूती मिलेगी, बल्कि गंगा किनारे बसे इलाकों में आर्थिक गतिविधियों और रोजगार को भी बढ़ावा मिल सकता है।
₹20 हजार करोड़ सरकार लगाएगी, बाकी निवेश निजी क्षेत्र से
पटना के ज्ञान भवन में आयोजित रोजगार मेले के समापन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने इस परियोजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि करीब ₹20,000 करोड़ का निवेश बिहार सरकार करेगी, जबकि लगभग ₹50,000 करोड़ निजी क्षेत्र से आने की उम्मीद है।
सरकार का लक्ष्य गंगा किनारे के क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ने के साथ-साथ वहां नई आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसर विकसित करना है।
कोइलवर से शुरू होकर गंगा किनारे 126 KM तक जाएगा प्रोजेक्ट
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रस्तावित मरीन ड्राइव सोन नदी पर स्थित कोइलवर से शुरू होगा और गंगा के किनारे करीब 126 किलोमीटर तक विकसित किया जाएगा।
इससे सड़क संपर्क बेहतर होने के साथ नदी किनारे के कई इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है। परियोजना के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में परिवहन और अन्य सुविधाओं के विस्तार की योजना बनाई जा रही है।
पटना का 21 KM मरीन ड्राइव पहले ही बन चुका है
बिहार में मरीन ड्राइव की अवधारणा नई नहीं है। पटना में करीब 21 किलोमीटर लंबा मरीन ड्राइव पहले ही तैयार किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना की शुरुआत 2013 में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल में हुई थी और करीब ₹6,000 करोड़ की लागत से इसे 2025 में पूरा किया गया।
अब सरकार इसी मॉडल को पटना से आगे बढ़ाकर गंगा किनारे बड़े क्षेत्र तक विस्तार देने की तैयारी कर रही है।
सिर्फ सड़क नहीं, रोजगार और निवेश पर भी नजर
सरकार के मुताबिक, ₹70,000 करोड़ की प्रस्तावित परियोजना का मकसद केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। निजी निवेश आने से गंगा किनारे के क्षेत्रों में नई आर्थिक गतिविधियां शुरू होने और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
अगर यह योजना तय रूप में आगे बढ़ती है, तो कोइलवर से लेकर गंगा किनारे के कई इलाकों तक कनेक्टिविटी का एक बड़ा नया कॉरिडोर तैयार हो सकता है।









