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बादलों के बीच बसा है दुनिया का सबसे ऊंचा शहर, 30000 लोग जी रहे मुश्किल हालात में, बिना सैलरी करते हैं काम

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समाचार-गढ़ 23 अगस्त, 2026।

दक्षिण अमेरिकी देश पेरू के एंडीज पर्वतों में एक ऐसा शहर बसा है, जहां जिंदगी आसान नहीं बल्कि बेहद चुनौतीपूर्ण है। समुद्र तल से करीब 5,100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ला रिनकोनाडा (La Rinconada) को दुनिया का सबसे ऊंचा स्थायी मानव निवास माना जाता है। यहां 30 हजार से ज्यादा लोग बेहद ठंड, प्रदूषण और ऑक्सीजन की कमी के बीच जिंदगी गुजार रहे हैं।

भूमध्य रेखा के करीब होने के बावजूद इतनी ज्यादा ऊंचाई के कारण यहां का औसत वार्षिक तापमान करीब 1.2 डिग्री सेल्सियस रहता है। रात के समय ठंड और भी ज्यादा बढ़ जाती है। कभी सिर्फ सोने की खदान के आसपास बना एक छोटा कैंप रहा यह इलाका आज हजारों लोगों की आबादी वाला शहर बन चुका है।

न सड़कें, न सीवेज और न साफ पानी की व्यवस्था

कागजों पर ला रिनकोनाडा को शहर कहा जाता है, लेकिन यहां की बुनियादी सुविधाएं बेहद खराब हैं। कई इलाकों में पक्की सड़कें, सीवेज सिस्टम और पाइपलाइन से पानी पहुंचाने जैसी सुविधाएं नहीं हैं।

लोग टीन की चादरों से बने ऐसे घरों में रहने को मजबूर हैं, जहां ठंड से बचने के लिए पर्याप्त इंसुलेशन तक नहीं है।

हालात को और गंभीर बनाता है सोने की खदानों में इस्तेमाल होने वाला पारा। सोने को अलग करने की प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में पारे के इस्तेमाल के कारण आसपास की मिट्टी, पानी और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ा है।

सबसे चौंकाने वाली है मजदूरों की काम करने की व्यवस्था

ला रिनकोनाडा की सोने की खदानों में काम करने वाले मजदूरों के लिए सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उन्हें हर महीने नियमित वेतन नहीं मिलता। यहां ‘काचोरियो’ नाम की एक पुरानी व्यवस्था के तहत मजदूर करीब 30 दिनों तक बिना वेतन काम करते हैं।

इसके बाद 31वें दिन उन्हें खदान से अपने कंधों पर जितना मलबा और पत्थर ले जाने की क्षमता हो, उतना ले जाने की अनुमति मिलती है। इसके बाद उस मलबे में सोना मिलेगा या नहीं, यह पूरी तरह किस्मत पर निर्भर करता है।

कई बार मजदूरों को ऐसा मलबा मिलता है जिसमें सोने की मात्रा बेहद कम होती है। यानी पूरे महीने की मेहनत के बाद भी उनके हाथ कुछ खास नहीं लगता।

सोने की तलाश में जान जोखिम में डालते हैं लोग

इसके बावजूद सोने की उम्मीद हजारों लोगों को इस बेहद कठिन जगह तक खींच लाती है। एक ही दिन में किस्मत बदलने और अमीर बनने की चाह में लोग अपनी सेहत और जान तक जोखिम में डाल देते हैं।

2001 से 2009 के बीच ला रिनकोनाडा की आबादी दोगुनी से भी ज्यादा हो गई थी। यहां पुरुष आमतौर पर खदानों की गहराइयों में काम करते हैं, जबकि महिलाएं खदानों से निकलने वाले कचरे में सोने के टुकड़े तलाशने या छोटे-मोटे सामान बेचने का काम करती हैं।

शहर से निकलने वाले सोने का एक बड़ा हिस्सा अनौपचारिक और अवैध बाजारों के जरिए आगे पहुंचता है।

यानी एक तरफ इसी शहर के नीचे छिपा सोना लोगों को अमीरी का सपना दिखाता है, तो दूसरी तरफ उसी सोने की तलाश यहां रहने वालों से उनकी सेहत, मेहनत और कभी-कभी जिंदगी तक की भारी कीमत वसूलती है।

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