समाचार-गढ़ 27 अगस्त, 2026।
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के अगले महीने भारत दौरे से पहले भारत-चीन संबंधों में हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल बीजिंग में हैं, जहां उन्होंने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। इसके बाद 26 अगस्त को दोनों देशों ने बैठक में हुई चर्चा पर संयुक्त बयान जारी किया।
8 मुद्दों पर बनी सहमति
अजीत डोभाल और वांग यी की बैठक में सीमा विवाद और LAC से जुड़े मुद्दों पर विशेष चर्चा हुई। विशेष प्रतिनिधियों (SR) की वार्ता के बाद दोनों देशों ने इन बिंदुओं पर सहमति जताई—
- सीमा निर्धारण को लेकर जल्द और ठोस नतीजों के लिए बातचीत आगे बढ़ाना।
- सीमा प्रबंधन के लिए अतिरिक्त बैठक स्थल और हॉटलाइन बनाना।
- LAC को लेकर दोनों पक्षों की समझ बेहतर करना।
- जमीनी स्थिति का समाधान राजनयिक और सैन्य माध्यमों से करना।
- सीमा-पार व्यापार को बढ़ावा देना।
- नदियों से जुड़े सहयोग का विस्तार करना।
- सैन्य हॉटलाइन के दो और चैनल स्थापित करना।
- दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर बातचीत जारी रखना।
LAC पर तनाव कम करने की कोशिश
संयुक्त बयान में कहा गया कि जमीनी स्तर पर किसी भी स्थिति का समाधान मौजूदा राजनयिक और सैन्य माध्यमों से तुरंत किया जाएगा। इसमें WMCC, स्थानीय कमांडर स्तर की बैठकें और अन्य सहमत तंत्र शामिल हैं। इसका उद्देश्य लंबित मुद्दों को सुलझाना और LAC पर गलतफहमी या गलत आकलन से बचना है।
दोनों देशों ने सीमा प्रबंधन को लेकर जल्द और ठोस नतीजे हासिल करने के लिए बातचीत आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। पिछले साल सीमा निर्धारण के तरीकों पर चर्चा के लिए WMCC के तहत विशेषज्ञ समूह बनाने पर सहमति बनी थी। इस बार बयान में ‘जल्द और ठोस’ नतीजों पर जोर दिया गया है।
कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर भी बनी सहमति
दोनों पक्षों ने सीमा-पार सहयोग में हुई प्रगति पर भी चर्चा की। भारत ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए भारतीय आधिकारिक तीर्थयात्री जत्थों की संख्या बढ़ाने की दिशा में चीन की ओर से किए गए प्रयासों की सराहना की।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि इन सहमतियों को जमीन पर कितना लागू किया जाता है और शी चिनफिंग की प्रस्तावित भारत यात्रा से दोनों देशों के रिश्तों में आगे क्या बदलाव आता है।









