समाचार-गढ़ 29 अगस्त, 2026।
अगर किसी पैकेज्ड फूड में नमक, चीनी या सैचुरेटेड फैट तय सीमा से ज्यादा हुआ, तो उसके पैकेट के सामने लाल रंग का षटकोणीय चेतावनी लेबल लगाने का प्रस्ताव है। FSSAI ने यह प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में रखा है। इसका मकसद ग्राहकों को खरीदारी के समय ही अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों के बारे में सचेत करना है।
दो चरणों में लागू होगा नियम
FSSAI के प्रस्ताव के मुताबिक, पहले चरण में उन प्रोडक्ट्स पर चेतावनी लगेगी, जिनमें नमक, चीनी या फैट में से कम से कम दो चीजें तय सीमा से ज्यादा होंगी। दूसरे चरण में किसी एक चीज की मात्रा ज्यादा होने पर भी चेतावनी लेबल लगाया जाएगा।
इन मानकों के लिए ICMR-NIN की ‘डायट्री गाइडलाइंस फॉर इंडियंस, 2024’ को आधार बनाया जाएगा।
घी, तेल, नमक और शहद को मिलेगी छूट
कुछ सिंगल-इंग्रीडिएंट और प्राकृतिक रूप से फैट, शुगर या नमक से भरपूर चीजों को इस लेबल से बाहर रखने का प्रस्ताव है। इनमें शुद्ध घी, खाद्य तेल, नमक, चीनी, गुड़ और शहद शामिल हैं।
मामला सुप्रीम कोर्ट तक कैसे पहुंचा?
3S एंड अवर हेल्थ सोसाइटी ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर पैकेज्ड फूड पर अनिवार्य चेतावनी लेबल लगाने की मांग की थी। 13 अगस्त की सुनवाई में कोर्ट ने FSSAI से नियम बनाने में देरी पर सवाल उठाए थे। इसके बाद FSSAI ने अपना प्रस्ताव कोर्ट में पेश किया।
आखिर फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग क्यों जरूरी?
अभी पैकेज्ड फूड की न्यूट्रिशनल जानकारी आमतौर पर पैकेट के पीछे दी जाती है, जिसे समझने में समय लगता है। नए लेबल का उद्देश्य यही जानकारी सरल और तुरंत समझ आने वाले तरीके से सामने दिखाना है, ताकि ग्राहक खरीदते समय बेहतर फैसला ले सके।
वहीं, सैचुरेटेड फैट घी, मक्खन, मलाई, पनीर और फैटी मीट जैसी चीजों में ज्यादा पाया जाता है, जबकि अनसैचुरेटेड फैट मूंगफली, बादाम, अखरोट, तिल, सरसों के तेल और मछली जैसी चीजों में पाया जाता है।









