समाचार-गढ़ 30 अगस्त, 2026।
बारूद पर उगा शहर
तबाहियों का भी अपना एक इतिहास होता है। आज की दुनिया लगातार युद्धों को झेल रही है। गाजा से लेकर यूक्रेन तक बारूद और तबाही की तस्वीरें सामने आ रही हैं। लेकिन क्या युद्ध किसी शहर को पूरी तरह मिटा सकता है? इतिहास कहता है—नहीं।
यूरोप में एक ऐसा शहर है जिसने 115 से ज्यादा युद्ध देखे और करीब 44 बार तबाही झेली, लेकिन हर बार अपनी राख से उठकर फिर खड़ा हो गया। आज वही शहर जिंदगी, संस्कृति और आधुनिकता के लिए जाना जाता है। यह कहानी है सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड की।
आखिर क्यों हर बार युद्ध की चपेट में आया ये शहर?
बेलग्रेड सावा और डैन्यूब नदियों के संगम पर बसा है। अपनी मातृभाषा में इसे बेओग्राद, यानी ‘सफेद शहर’ कहा जाता है। लेकिन इसका इतिहास सफेद रंग से ज्यादा युद्ध और संघर्ष के निशानों से भरा है।
करीब 10 हजार साल पुराने मानव सभ्यता के अवशेष समेटे यह शहर यूरोप के पूर्व और पश्चिम के बीच एक अहम रणनीतिक स्थान पर रहा। यही इसकी ताकत भी बनी और सबसे बड़ी कमजोरी भी।
ईसा पूर्व चौथी सदी में केल्ट्स से लेकर रोमन साम्राज्य के ‘सिंगिदुनम’ तक, अलग-अलग ताकतों की नजर इस शहर पर रही। 5वीं सदी में अत्तिला द हुन ने इसे तबाह किया। इसके बाद गॉथ, बाइजेंटाइन, फ्रैंक्स और बुल्गारियाई शासकों के दौर आए।
1521 में ऑटोमन साम्राज्य के कब्जे के बाद बेलग्रेड, ऑटोमन और ऑस्ट्रियाई साम्राज्य के बीच संघर्ष का बड़ा केंद्र बन गया।
नाम बदलते रहे, शहर फिर भी खड़ा रहा
बेलग्रेड ने अपने इतिहास में कई नाम और कई शासक देखे। सिंगिदुनम से लेकर बेओग्राद तक इसका नाम बदलता रहा, लेकिन शहर का अस्तित्व खत्म नहीं हुआ।
19वीं सदी में ऑटोमन शासन से मुक्ति के बाद भी इसके संघर्ष खत्म नहीं हुए। प्रथम विश्व युद्ध में यहां भारी बमबारी हुई और द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी ने शहर को बुरी तरह तबाह कर दिया।
इसके बाद कम्युनिस्ट युगोस्लाविया की राजधानी बना बेलग्रेड 1990 के दशक में युगोस्लाविया के विघटन का गवाह बना और फिर 1999 की NATO बमबारी ने इसे एक बार फिर युद्ध के बीच ला खड़ा किया।
आज उसी शहर की तस्वीर बिल्कुल अलग है
आज बेलग्रेड की आबादी करीब 17 लाख है। शहर में सैकड़ों सांस्कृतिक स्मारक, संग्रहालय, थिएटर और पुरातात्विक स्थल मौजूद हैं।
सावा नदी के उत्तरी किनारे पर बसा न्यू बेलग्रेड शहर का आधुनिक चेहरा है। गगनचुंबी इमारतें, बड़ी कंपनियों के कार्यालय और आधुनिक शॉपिंग मॉल दिखाते हैं कि बेलग्रेड ने अपने अतीत की तबाही को पीछे छोड़कर भविष्य की ओर कदम बढ़ा दिया है।
पत्थरों में आज भी जिंदा है युद्ध का इतिहास
बेलग्रेड का प्राचीन किला आज भी शहर की सहनशक्ति का प्रतीक है। इसकी दीवारों ने रोमनों, सर्बों, हंगेरियनों, तुर्कों और ऑस्ट्रियाई सैनिकों के संघर्ष देखे हैं।
किले के सैन्य संग्रहालय में मौजूद हजारों हथियार और युद्धकालीन उपकरण इस शहर के रक्तरंजित इतिहास की कहानी सुनाते हैं।
लेकिन इसी शहर का एक दूसरा चेहरा भी है।
जहां कभी गोलियां चलीं, आज वहां संगीत गूंजता है
बेलग्रेड का बोहेमियन इलाका स्काडारलिया अपनी पुरानी पत्थर की गलियों और पारंपरिक रेस्तरां के लिए मशहूर है। यहां आज भी 19वीं सदी के माहौल की झलक मिलती है।
और रात होते ही शहर का एक और रंग सामने आता है।
कभी तोपों की आवाज से कांपने वाला बेलग्रेड आज अपनी नाइटलाइफ के लिए मशहूर है। सावा और डैन्यूब के पानी पर बने तैरते रेस्तरां और क्लब, जिन्हें ‘स्पलावोवी’ कहा जाता है, पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र हैं।
44 बार मिटाने की कोशिश हुई, लेकिन हर बार लौट आया
बेलग्रेड की कहानी सिर्फ युद्धों की गिनती नहीं है। यह उस जिद की कहानी है, जिसमें एक शहर बार-बार टूटकर भी खुद को दोबारा खड़ा करता रहा।
115 से ज्यादा युद्धों और करीब 44 बार तबाही के बाद भी आज बेलग्रेड सिर्फ जिंदा नहीं है, बल्कि अपनी पूरी शान से आगे बढ़ रहा है।
यही इस शहर का सबसे बड़ा सबक है—युद्ध इमारतें गिरा सकते हैं, सड़कें उजाड़ सकते हैं और शहरों के नक्शे बदल सकते हैं, लेकिन लोगों के जीने का जज्बा और किसी शहर की आत्मा को खत्म करना इतना आसान नहीं।









