समाचार-गढ़ 29 अगस्त, 2026।
पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने को लेकर 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी। याचिका में मांग की गई है कि देश के हर पेट्रोल पंप पर ग्राहकों को साफ तौर पर बताया जाए कि पेट्रोल में कितने प्रतिशत इथेनॉल मिला है। मामले की सुनवाई जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ करेगी।
पेट्रोल पंप और बिल पर लिखी जाए इथेनॉल की मात्रा
याचिकाकर्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने मांग की है कि हर पेट्रोल पंप के डिस्पेंसिंग नोजल पर स्पष्ट लेबल लगाया जाए। साथ ही ग्राहक को मिलने वाले फ्यूल बिल पर भी इथेनॉल ब्लेंडिंग की प्रतिशत मात्रा लिखी जाए।
किस गाड़ी में कौन सा पेट्रोल सही?
याचिका में वाहन मालिकों के लिए एक सार्वजनिक व्हीकल-कम्पैटिबिलिटी डेटाबेस बनाने की मांग की गई है। इसमें वाहन के मॉडल, इंजन, निर्माण वर्ष और उसके लिए उपयुक्त इथेनॉल ब्लेंड की जानकारी हो, ताकि लोग जान सकें कि उनकी गाड़ी E20 पेट्रोल के लिए कितनी अनुकूल है।
E20 के असर की जांच के लिए कमेटी की मांग
याचिका में पेट्रोलियम मंत्रालय, सड़क परिवहन मंत्रालय, BIS और स्वतंत्र ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों की एक समिति बनाने का प्रस्ताव है। यह समिति अलग-अलग वाहनों पर E20 के असर की जांच कर माइलेज, इंजन लाइफ, मेंटेनेंस, वारंटी और इंश्योरेंस पर प्रभाव की रिपोर्ट सार्वजनिक करे।
इसके साथ ही इथेनॉल ब्लेंडिंग के पर्यावरण, पानी की खपत, खाद्य सुरक्षा और पशु चारे पर संभावित असर की भी समीक्षा की मांग की गई है।
पुराने वाहनों के लिए भी ट्रांजिशन प्लान
याचिका में पुराने या E20 के अनुकूल नहीं होने वाले वाहनों के लिए समयबद्ध ट्रांजिशन प्लान बनाने की मांग की गई है। जहां संभव हो, वहां कम इथेनॉल वाले पेट्रोल की उपलब्धता पर भी विचार करने की बात कही गई है।
अब 31 अगस्त की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट इन मांगों पर क्या रुख अपनाता है, इस पर वाहन मालिकों और पेट्रोलियम सेक्टर की नजर रहेगी।









