समाचार-गढ़ 1 सितंबर, 2026|
SCO शिखर सम्मेलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब रूस के साथ अपने संबंधों को लेकर भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बना हुआ है।
बैठक के लिए करीब 50 मिनट का समय तय किया गया था। खास बात यह है कि पुतिन अगले महीने भारत के दौरे पर आने वाले हैं। ऐसे में इस मुलाकात को आगामी भारत यात्रा से पहले दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करने के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-रूस के बीच ‘खास और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ के अलग-अलग पहलुओं की समीक्षा की और सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा की।
यूक्रेन युद्ध का भी उठा मुद्दा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत के दौरान यूक्रेन युद्ध का भी जिक्र किया।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत शांतिपूर्ण समाधान के लिए किए जा रहे हर प्रयास का समर्थन करता है।
यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत लगातार रूस और पश्चिमी देशों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता रहा है।
मुलाकात के बाद पीएम मोदी ने क्या कहा?
पुतिन से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि दोनों नेताओं के बीच भारत-रूस संबंधों के सभी प्रमुख पहलुओं पर व्यापक चर्चा हुई।
पीएम मोदी के मुताबिक, हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
उन्होंने ऊर्जा, इनोवेशन, अंतरिक्ष, उर्वरक और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क को भारत-रूस दोस्ती के प्रमुख क्षेत्र बताया।
तेल, गैस और उर्वरकों पर भी हुई चर्चा
बैठक में दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर भी बातचीत होने की संभावना है।
भारत के लिए रूस कच्चे तेल और उर्वरकों का एक बड़ा आपूर्तिकर्ता है। ऐसे में तेल और गैस की सप्लाई, उर्वरकों की उपलब्धता और परमाणु ऊर्जा जैसे मुद्दे अहम माने जा रहे हैं।
दोनों देशों के बीच कारोबार बढ़ रहा है, लेकिन व्यापार में असंतुलन भारत के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
ऐसे में भारतीय उत्पादों के रूस में निर्यात, निवेश, भुगतान व्यवस्था और दोनों देशों के बीच व्यापार को ज्यादा संतुलित बनाने के तरीकों पर भी चर्चा अहम हो सकती है।
रक्षा सहयोग पर भी नजर
भारत और रूस के रिश्तों में रक्षा सहयोग हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है।
बैठक में सैन्य उपकरणों की सप्लाई, स्पेयर पार्ट्स, तकनीकी सहयोग और रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन को आगे बढ़ाने जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।
भारत आज भी बड़ी संख्या में रूसी मूल के रक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करता है। इसलिए रूस के साथ रक्षा संबंधों को बनाए रखना और सप्लाई चेन को मजबूत करना भारत के लिए अहम है।
S-400 और Su-57 पर क्या होगा फैसला?
रूस भारत को पांचवीं पीढ़ी के Su-57 फाइटर जेट की पेशकश कर चुका है। रूस इसके साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और सोर्स कोड उपलब्ध कराने की बात भी कह रहा है।
हालांकि, भारत की ओर से इस प्रस्ताव पर अभी कोई अंतिम प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वहीं, S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर भी दोनों देशों के बीच आगे बातचीत हो सकती है। भारत के पास पहले से S-400 की यूनिट्स मौजूद हैं और इनके प्रदर्शन को देखते हुए अतिरिक्त यूनिट्स की खरीद को लेकर भी चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।
भारत-रूस रिश्तों के लिए क्यों अहम है मुलाकात?
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब दोनों देशों के बीच ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और अंतरिक्ष समेत कई क्षेत्रों में सहयोग जारी है।
साथ ही, यूक्रेन युद्ध और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत पर रूस से दूरी बनाने का दबाव भी है।
ऐसे में मोदी-पुतिन की मुलाकात का संदेश साफ है—भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर रूस के साथ रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी रखेगा।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि अगले महीने पुतिन की भारत यात्रा के दौरान इन चर्चाओं का क्या नतीजा निकलता है और क्या S-400, Su-57, तेल-गैस और रक्षा सहयोग पर कोई बड़ा फैसला सामने आता है।









