समाचार-गढ़ 10 सितंबर, 2026।
इस्लामाबाद। दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले बलूचिस्तान का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। बलूच नेता मीर यार ने BRICS के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों को खुला पत्र लिखकर सम्मेलन के एजेंडे में बलूचिस्तान के मुद्दे को शामिल करने की अपील की है।
मीर यार ने ब्रिक्स देशों से बलूचिस्तान की राजनीतिक स्थिति, स्वतंत्रता के अधिकार और एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में उसके भविष्य पर विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने दावा किया कि बलूचिस्तान का मुद्दा अभी भी अनसुलझा है और बलूच लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को मान्यता मिलनी चाहिए।
ब्रिक्स से राजनयिक संबंधों पर विचार की अपील
पत्र में मीर यार ने BRICS से ‘बलूचिस्तान गणराज्य’ के साथ राजनयिक, राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध स्थापित करने पर विचार करने की अपील की है। उन्होंने BRICS को ग्लोबल साउथ के बीच आर्थिक सहयोग, राजनीतिक-सुरक्षा संवाद और विकास के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया।
उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान को अलग नजरिए से देखने और उसके भविष्य पर विचार करने की जरूरत है।
बलूचिस्तान के इतिहास का भी किया जिक्र
मीर यार ने अपने पत्र में बलूचिस्तान के प्राचीन इतिहास का उल्लेख करते हुए मेहरगढ़ को दक्षिण एशिया के महत्वपूर्ण प्रागैतिहासिक स्थलों में से एक बताया। उन्होंने 11 अगस्त 1947 की तारीख को बलूच राष्ट्रीय इतिहास में महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इसे बलूचिस्तान की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जाता है।
उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में बलूच लोग मानते हैं कि बलूचिस्तान की आजादी का अधिकार समाप्त नहीं हुआ और उसकी संप्रभुता का सवाल अभी भी बाकी है।
BRICS के लिए क्यों महत्वपूर्ण बताया?
पत्र में बलूचिस्तान की रणनीतिक और आर्थिक स्थिति को भी BRICS देशों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। मीर यार के अनुसार, दक्षिण एशिया, मध्य एशिया, मध्य पूर्व और अरब सागर के बीच स्थित होने के कारण बलूचिस्तान समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम है।
उन्होंने लंबी तटरेखा, बंदरगाहों की संभावनाओं और समुद्री मार्गों तक पहुंच का जिक्र करते हुए कहा कि एक स्थिर और स्वतंत्र बलूचिस्तान अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कनेक्टिविटी का केंद्र बन सकता है।
खनिज संसाधनों का भी किया जिक्र
मीर यार ने बलूचिस्तान में तांबा, सोना, कोयला, प्राकृतिक गैस और अन्य रणनीतिक खनिजों की मौजूदगी का उल्लेख किया। इसके अलावा उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि, मत्स्य पालन और पशुपालन में भी संभावनाएं बताईं।
पत्र में BRICS के अलग-अलग देशों के लिए संभावित फायदे भी गिनाए गए हैं। भारत के लिए अरब सागर के जरिए समुद्री और व्यापारिक कनेक्टिविटी, रूस के लिए मध्य एशिया और हिंद महासागर तक पहुंच तथा चीन के लिए एशियाई और हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापारिक संभावनाओं का दावा किया गया है।
वहीं सऊदी अरब और UAE के लिए ऊर्जा एवं समुद्री व्यापार, मिस्र के लिए क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और इंडोनेशिया के लिए समुद्री व आर्थिक संबंधों की संभावनाओं का उल्लेख किया गया है।









