समाचार-गढ़ 19 सितंबर, 2026।
बीजिंग: रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की अमेरिकी नीति के बीच चीन ने अमेरिका को कड़ा जवाब दिया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि दूसरे देशों के साथ उसका सामान्य आर्थिक और व्यापारिक सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाता और इसमें किसी तीसरे पक्ष का दबाव या दखल स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यह मामला भारत के लिए भी अहम है, क्योंकि अमेरिका के नए कानून में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दिया गया है। भारत और चीन दोनों रूस से ऊर्जा खरीदने वाले बड़े देश हैं।
चीन ने एकतरफा प्रतिबंधों का किया विरोध
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन समानता और पारस्परिक लाभ के आधार पर दूसरे देशों के साथ सामान्य आर्थिक और व्यापारिक सहयोग करता है। उन्होंने कहा कि इस तरह का सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाता और इसे किसी तीसरे पक्ष के दबाव से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
गुओ ने अमेरिका की ओर से लगाए जाने वाले ऐसे प्रतिबंधों और ‘लॉन्ग-आर्म जूरिस्डिक्शन’ का भी विरोध किया, जिनका अंतरराष्ट्रीय कानून में आधार नहीं है और जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी प्राप्त नहीं है।
अमेरिका ने रूस पर दबाव बढ़ाने वाला कानून बनाया
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 को 262-159 वोट से मंजूरी दी थी। इसके बाद विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप के पास गया। 18 सितंबर को ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए, जिससे यह कानून बन गया।
इस कानून का उद्देश्य रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। इसमें रूस के तेल निर्यात से जुड़े उन जहाजों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है, जिन्हें प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।
भारत और चीन पर क्यों है नजर?
नए कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से तेल या गैस खरीदने वाले देशों के खिलाफ 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने की व्यापक शक्ति मिलती है। भारत और चीन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं, इसलिए दोनों पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, टैरिफ का वास्तविक इस्तेमाल कब और किस देश पर किस स्तर पर किया जाएगा, यह अमेरिकी प्रशासन के फैसलों पर निर्भर करेगा।
भारत ने भी साफ किया है कि उसकी ऊर्जा जरूरतें प्राथमिकता हैं और वह अपने व्यापार तथा आर्थिक हितों की रक्षा करेगा। नई अमेरिकी नीति को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बातचीत भी जारी है।
चीन-अमेरिका के बीच भी जारी है व्यापार पर बातचीत
इस पूरे विवाद के बीच चीन और अमेरिका के बीच व्यापार से जुड़े मुद्दों पर बातचीत जारी है। ऐसे में रूस से ऊर्जा खरीद और उस पर प्रस्तावित अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे व्यापारिक तनाव में एक और महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
चीन का कहना है कि दूसरे देशों के साथ उसके सामान्य व्यापारिक संबंधों में किसी तीसरे देश को दबाव बनाने या हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।








