समाचार-गढ़ 20 सितंबर, 2026।
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अफगान तालिबान ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि अगर उसकी सेना ने अफगानिस्तान की सीमा के अंदर सैन्य कार्रवाई की तो उसका जवाब दिया जाएगा। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि अफगानिस्तान को अपनी संप्रभुता और क्षेत्र की रक्षा करने का अधिकार है।
अल-अरबिया इंग्लिश को दिए इंटरव्यू में मुजाहिद ने पाकिस्तान के उन आरोपों को भी खारिज किया कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान में हमले करने वाले चरमपंथी संगठनों के लिए किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने दोनों देशों के बीच विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने और सऊदी अरब की मध्यस्थता का समर्थन किया।
पाकिस्तान को तालिबान की सीधी चेतावनी
जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि अगर पाकिस्तान अफगानिस्तान के अंदर हमला करता है तो तालिबान सरकार अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगी। उन्होंने आत्मरक्षा के अधिकार का हवाला देते हुए कहा कि अफगानिस्तान अपनी जमीन पर किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब देने का अधिकार रखता है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच सीमा और आतंकवाद को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। मार्च 2026 में भी दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और सीमा पार हमलों की स्थिति बनी थी।
पाकिस्तान का क्या है आरोप?
पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ सक्रिय चरमपंथी संगठनों द्वारा किया जा रहा है। इस्लामाबाद विशेष रूप से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को लेकर तालिबान प्रशासन पर सवाल उठाता रहा है।
पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि अफगानिस्तान में मौजूद ठिकानों से चरमपंथियों को भर्ती, प्रशिक्षण और हथियार उपलब्ध कराए जाते हैं और इसके बाद वे पाकिस्तान के अंदर हमले करते हैं।
हालांकि, तालिबान इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है। मुजाहिद ने कहा कि काबुल प्रशासन किसी भी ऐसे संगठन को अफगान जमीन का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ करने की अनुमति नहीं देता।
तालिबान ने आरोपों को बताया पाकिस्तान की आंतरिक समस्या
मुजाहिद ने पाकिस्तान में जारी चरमपंथी हिंसा को वहां की आंतरिक सुरक्षा चुनौती बताया। उनका कहना है कि पाकिस्तान में TTP और बलूचिस्तान से जुड़ी हिंसा की समस्या तालिबान के सत्ता में आने से पहले से मौजूद रही है।
तालिबान का कहना है कि अफगानिस्तान को पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा समस्याओं के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।
दूसरी तरफ, पाकिस्तान का कहना है कि सीमा पार मौजूद आतंकवादी ढांचे उसके लिए गंभीर सुरक्षा खतरा हैं। यही आरोप दोनों देशों के बीच तनाव का एक प्रमुख कारण बने हुए हैं।
बातचीत और खुफिया सहयोग की पेशकश
तनाव के बीच तालिबान प्रवक्ता ने पाकिस्तान के साथ बातचीत की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने और सहयोग के लिए एक मजबूत तंत्र बनाया जाना चाहिए।
मुजाहिद के मुताबिक, सैन्य टकराव के बजाय बातचीत के जरिए सुरक्षा संबंधी विवादों को सुलझाने की कोशिश होनी चाहिए।
सऊदी अरब से मध्यस्थता की अपील
तालिबान प्रवक्ता ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच विवाद में सऊदी अरब की मध्यस्थता का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब दोनों देशों का मित्र है और वह दोनों के बीच मतभेद कम करने में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है।
दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए पहले भी क्षेत्रीय देशों ने बातचीत और मध्यस्थता की पेशकश की है। मार्च में भी सऊदी अरब और कतर समेत कई देशों ने संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान की अपील की थी।
सीमा पर तनाव के बीच बढ़ी चिंता
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच करीब 2,600 किलोमीटर लंबी सीमा है। आतंकवाद, सीमा प्रबंधन और सैन्य कार्रवाई को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद लगातार बना हुआ है।
पाकिस्तान अफगानिस्तान पर चरमपंथियों को पनाह देने का आरोप लगाता है, जबकि तालिबान इन आरोपों से इनकार करता है और पाकिस्तान की सुरक्षा समस्याओं को उसका आंतरिक मामला बताता है।
ऐसे में तालिबान की ताजा चेतावनी ने दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव के बीच बातचीत और मध्यस्थता की जरूरत को फिर सामने ला दिया है।








